कातिल तुम /मसीहा भी लगते—सुशील शर्मा

हाइकु-105(सेनेरयु) सुशील शर्मा कातिल तुम मसीहा भी लगते ये मेरे दोस्त। एक खंजर तेरे हाथ में कैसा गले में बांह। मेरे अपने खड़े उस तरफ दुश्मन बन। दिल जो टूटा मुस्काते रहे हम कोई न जाना। मेरा अंतस ईश्वर या Read More …

ये तेरा कैसा इकरार है——-रघु आर्यन

पूछूँ एक सवाल सभी से, ये तेरा कैसा इकरार है। बांध गले फांसी फंदे से , करे जाति से इजहार है। पैदा हो मिला समाज से, जो दिया गले में डार है। कटते भिड़ते  अपनों से, कैसा जाति से खुमार Read More …

पंचभूत का मिश्रण यह जीवन–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

पंचभूत का मिश्रण यह जीवन–डॉ० श्रीमती तारा सिंह   झंझा    प्रवाह    से      निकला      यह      जीवन पंचभूत       का         है         भैरव        मिश्रण इसमें    नहीं  है  सुख  का एक  भी  कण तभी तो मानव को तुच्छ लगता यह भुवन पलकों के दल को Read More …

वह ओपहीन तो था ,भावरहित नहीं –डॉ० श्रीमती तारा सिंह

वह ओपहीन तो था ,भावरहित नहीं था जिसकी किलक मेरे  कानों में ,दिवा– रात्री रहती थी भरी जिसे  मैं  बाँहों में उठाकर , उर से  लगा रखता  था संभाल जिसका ध्यान मैं उन्निद्र पलों में भी रखता था संजोकर उसकी Read More …

बीत जायेंगे जीवन के बचे-खुचे दिन चार–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  बीत जायेंगे जीवन के बचे – खुचे दिन चार   कभी जॊ कहता था, माँ तुम जो मेरे पास नहीं होती हो, तो रात हो जाती पहाड़ तुम्हीं मेरी बैत-उल्‍-हरम हो, जमाने में तुम-सी नहीं कोई दूसरी, रू-दादे-नशात माँ Read More …

हिन्द है वतन हमारा, हम हिन्द के पुजारी–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

             हिन्द है वतन हमारा, हम हिन्द के पुजारी हिन्द है वतन हमारा, हम हैं हिन्द के पुजारी जागें   तो , हिन्द  के  आनन   में  जागें सोयें   तो  हिन्द  की  नीव   तले   सोयें हिला  सके न  इसके, विटप  डाल को Read More …

*भगवान या शैतान* —-सुशील शर्मा

*भगवान या शैतान* सुशील शर्मा तुमने पहले मुझे भगवान का दर्जा दिया खूब पूजा बहुत माना फिर मन भर गया तो  मुझे इंसान भी न रहने दिया। सीधा शैतान का तमगा टांग दिया मेरे गले में मेरे चेहरे पर लटके Read More …

कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत,हम बहुत रोये –डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत,हम बहुत रोये मगर हमारे अश्कों को तुम्हारे दामन का सहारा न मिला   दर्दे-दिल  सुनाता  जाकर किसे , मेरे पाँव के नीचे जमीं तो थी,मगर आसमां पे कोई सितारा न मिला   राहें – Read More …

ऐन वक्त पर बात बिगड़ गई—डा० श्रीमती तारा सिंह

ऐन   वक्त  पर  बात  बिगड़  गई उस   बेवफ़ा   से  आखें  लड़  गईं   देखा  जो , डूबकर  वीराना था वहाँ पसरा  हुआ, जहाँ  तक  नज़र  गई   पहले  प्यार , फ़िर  इनकार ,  बाद अपने   हर   वादे  से  मुकर  गई Read More …