पहचान के लिये–अ कीर्ति वर्द्धन

पहचान के लिये

Inboxx
Kirti Vardhan 8:42 AM (3 hours ago)
to kirti, bcc: me

मर चुका हूँ मैं, दुनिया जहान के लिये,

जिन्दा हूँ मगर, खास काम के लिये|

बहता पानी होता है, जागीर प्यासे की,

मत रुख बदल, खारे मुकाम के लिये|

पहूँच दरिया पर, “मै” को डूबा आया,

बाकी बचा हूँ, किसी इम्तिहान के लिये|

चाहता हूँ जीना यूँ ही, यहाँ तन्हा होकर,

अन्जान रहकर भी, पहचान के लिये|

मत तलाशना वजूद मे, अतीत को मेरे,

चाहत कुछ करने की, वर्तमान के लिये|

चिपका रहा अतीत से, दर्द जान न सका

जीना चाहता हूँ, दर्द के अवसान के लिये|
अ कीर्ति वर्द्धन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook
Twitter
LinkedIn
INSTAGRAM