अमरेश सिंह भदौरिया –अमरेश सिंह भदौरिया


मुक्तक

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Amresh Singh Fri, Oct 18, 8:18 PM (11 hours ago)
to me

मेरी मुश्किलों का  वो हल ढूँढ़ता है।

जो हमदर्द था  अब  गरल ढूँढ़ता है।

नादान  है   या   समझदार   ज्यादा,

अधिक सोचकर वो सरल ढूँढ़ता है।

©अमरेश सिंह भदौरिया

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