प्रेरणा का आतंक (व्यंग्य)–डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

प्रेरणा का आतंक -व्यंग्य

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Praveen Kumar 6:20 AM (5 hours ago)
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प्रेरणा का आतंक  शीर्षक 
दो मित्र चाय की दुकान पर मिले तो गुफ्तगू इ स तरह शुरू हुई। प्रवीण –  अंबर भाई यह प्रेरणा एप क्या है शिक्षकों में बड़ा बवाल मचा है ।अंबर भाई  -यह सरकारी शिक्षकों के लिए दर्पण है जिसमें वे अपना तथा छात्रों का मुख देख सकेंगे। प्रवीण  -क्या मतलब, अंबर भाई? प्रेरणा एप सरकार की प्रेरणा स्वरुप बना है जिसका सरवर यूनाइटेड स्टेट में है। हमारे सरकारी शिक्षक व छात्र इस ऐप के माध्यम से नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे प्रवीण भाई – यदि नेटवर्क नहीं हुआ तो ? अंबर भाई -तो, स्कूल में अवकाश है ,सारे शिक्षक व छात्र अनुपस्थित हैं ,शिक्षकों का 1 दिन का वेतन उस दिन आहरित नहीं होगा ।सरकार का बस बच्चों पर चलता नहीं, बच्चे कटाई करें, निराई करें ,माता पिता का हाथ बटायें, किंतु विद्यालय सेअनुपस्थित हुए तो उसका शिक्षक जिम्मेदार होगा ।बेचारे शिक्षक घर के ना घाट के। प्रवीण – मतलब शिक्षक जो डंडा छात्रों पर चलाते थे उसी चाबुक से सरकारी शिक्षकों को हलाल किया जाएगा उन्हें राष्ट्र प्रेम का पाठ पढ़ाया जाएगा ।प्रवीण भाई  – शिक्षकोंका विरोध किस बात को लेकर है, अम्बर भाई – शिक्षक दूरदराज इलाकों से आते हैं ,कभी कभी विलंब हो सकता है, कभी बारिश है ,कभी मौसम की मार, कभी वाहन की समस्या। उस पर तुर्रा ऐ कि बिलम्ब होते ही वेतन कटेगा,और नौकरी पर भी आ सकती है ।प्रवीण भाई-  भाई शिक्षा आवश्यक सेवा अधिनियम के अंतर्गत तो आता नहीं है, फिर छात्रों का भविष्य  बनाने के और तरीके भी हैं। फिर यह मारामारी क्यों? बायोमेट्रिक उपस्थिति भी इसका उपाय है। सेल्फी लेने में ही अनावश्यक समय खर्च हो जाएगा। योजना व्यावहारिक होनी चाहिए ।अंबर भाई -गांव गांव प्राइमरी स्कूल खुले हैं। एक-दो शिक्षक कक्षा 5 तक पढ़ाते हैं प्रधानाध्यापक तो दस्ती कार्य में ही  लगे रहते हैं ।ऐसे में सरकार शिक्षकों पर नकेल कस कर कौन सा तीर मारना चाहती है।प्रवीण भाई – अंम्बर भाई  प्राइवेट स्कूलों जगह -जगह खुले हैं।अभिभावक उन स्कूलों में बच्चे शाख के लिए भेजते हैं  किंतु नतीजा ,वही ढाक के तीन पात, काला अक्षर भैंस बराबर। बच्चे जब सरकारी स्कूलों में आते हैं तो उन्हें फिर से गिनती , पहाड़ा, ककहरा शुरू करने की नौबत आती है ।  शिक्षकों की राय की भी मानता होनी चाहिए ।उनसे भी फीडबैक लेकर योजना बनानी चाहिए ।अंम्बर भाई आज कल शिक्षा विद्  पाश्चात्य सभ्यता से प्रेरित होते हैं। उन्हें वैदिक गुरुकुल परंपरा की जानकारी नहीं है। शिक्षक और छात्रों का आत्मीय संबंध होता है यहां व्यवसायीकरण हो रहा है। व्यवसायीकरण की आड़ में छात्रों की योग्यता का भी अवमूल्यन होता है। प्रवीण भाई -तो प्रेरणा एप लागू होकर रहेगा।  अम्बर भाई -हां भाई जिसकी लाठी उसी की भैंस  एक कहावत है ।तुलसी बाबा भी कह गए हैं समरथ को नहिं दोष गुसाईं ।अब देखो ऊँट किस करवट बैठता है शिक्षक तो स्वत: प्रेरणा स्वरुप बनते है। वे आजीविका हेतु किसी पर निर्भर नहीं होने चाहिए। शिक्षक का राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान होता है।
डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव .व्यंग्य लेखक

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