अहसास (गजल)– बाल कवि सौरभ कुमार

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कवि सौरभ कुमार 11:15 AM (7 hours ago)
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मोहब्बत का अहसास होता ही रह गया, 

पता नही मैं कब तक सोता ही रह गया ।
मोहब्बत किया था मैंने उससे एक दफा, 

पर कहने की हिम्मत जुटाता ही रह गया ।
दिल में तो मेरे काफी ख्याल थे उसके लिए, 

पर आज या कल कहूँ सोचता ही रह गया ।
जगाना था प्यार भरा भाव उसके दिल में, 

मैं तो उसके दिल में विष बोता ही रह गया ।
है मोहब्बत की उस राह पर खड़ा, सौरभ,

अहसास मोहब्बत का करता ही रह गया ।
कभी जीता था मैं उस माशुका के प्यार में,

उसी के प्यार में आज मैं रोता ही रह गया ।
पाना था उसकी मोहब्बत को मुझे किसी पल,

प्रतिदिन मोहब्बत उसकी खोता ही रह गया ।
अहसासों में उसे ढूँढ़ता फिर रहा हर गली, 

ना चाहते हुए भी हर-पल मरता ही रह गया ।

सौरभ कुमार ठाकुर बाल कवि एवं लेखक ग्राम-रतनपुरा, डाकघर-गिद्धा, थाना-सरैया, जिला-मुजफ्फरपुर, राज्य-बिहार, देश-भारत, पिन कोड- 843106मो0- 8800416537

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