आज का खूबसूरत मिसरा –विनोद निर्भय

विनोद ‘निर्भय’Yesterday ·  कल मेरे ह्वाट्सएप पर एक अनजान नम्बर से संदेश आया जिसमें एक साहित्यिक समूह ‘आगाज़’ (नाम पहली बार सुना था) हेतु मेरी एक ग़ज़ल का मिसरा फ़िलबदीह कार्यक्रम हेतु प्रयोग करने सम्बन्धी विवरण था तथा ऐसा करने हेतु मुझसे अनुमति मांगी गयी थी…… आज यह पोष्ट समूह में देखा तो सुखद अनुभूति हुई ….. आगाज़ समूह का आभारी हूँ,इस योग्य समझने के लिए ……
( कार्यक्रम का पूरा विवरण नीचे की लिंक को क्लिक करके देखा जा सकता है )

https://www.facebook.com/groups/317407202056480/permalink/731348850662311/?app=fbl

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