कवि सुखमंगल सिंह की काव्य साधना (प्रथम खण्ड , ई बुक )की समीक्षा–सुरेन्द्र वाजपेयी

समीक्षा :- कवि सुखमंगल सिंह की काव्य साधना (प्रथम खण्ड , ई बुक )

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Sukhmangal Singh Thu, Jul 25, 8:56 PM (14 hours ago)
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समीक्षा :- कवि सुखमंगल सिंह की काव्य साधना (प्रथम खण्ड , ई बुक )——————————————————————————गूगल के क्षेत्रीय मार्गदर्शक एवं वाराणसी के बहुचर्चित कवि सुखमंगल सिंह रचित यह संकलन कई दृष्टियों से सूचनापरक एवं पठनीय है | इसमें उन्होंने  भारत की कुछ ऐतिहासिक घटनाओं, स्मारकों,मंगल-मूर्तियों के बारे में सचित्र जानकारियाँ दी हैं तो वर्तमान परिवेश की भी खोज – खबर को तिथिवार उद्घृत किया है | इससे आप पाठकों का ज्ञान-वर्धन होता है |राष्ट्र भावी योजनाओं , सरकारी घोषणाओं और राष्ट्रीय विकास को भी प्रस्तुत कर सकने में कवि ने सफलता प्राप्त की है | इन्हीं सामग्रियों के साथ – साथ  कवि सुखमनंगल सिंह की अनेकानेक ओजस्वी कविताएं भी पाठकों का ध्यान आकर्षित करती हैं जिनमें राष्ट्र भाव ,राष्ट्र भक्ति , सामाजिक समरसता और पर्यावरण वचन और शुद्ध रखने की गूँज सुनाई पड़ती है | कवि मानवतावादी सन्देश का प्रचारक है | अतः प्रेम, सौहार्द ,सेवा ,सहयोग जैसे भावों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु वह प्रतिबद्ध दिखाई पड़ता है जो प्रशंसनीय है | आशा है , इस कृति के माध्यम से कवि सुखमंगल सिंह विश्व स्तर पर भारतीय दृष्टिकोणों के प्रति ध्यान आकर्षित करेंगे | कामना है,कवि का रचना संसार व्यापक और अधिक से अधिक सुदृढ़ हो |                                                           
                                                 हस्ताक्षर ,सुरेन्द्र वाजपेयी , 
                                            —  समीक्षक लेखक ,,व्यंग,नव गीत 
 हिन्दी प्रचारक पब्लिकेशन्स प्रा ० लि ० सी २१/३० पिशाचमोचन ,वाराणसी -२२१०१० 
उत्तर प्रदेश – भारत 

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