आओगी तुम हमे मिलने –Vipra Jay Choubisa

Vipra Jay Choubisa Wed, May 29, 4:49 PM (12 hours ago)
to me

मुक्तक
(1) आओगी तुम हमे मिलने तराना सा हुआ ये दिलतमन्ना में मिलन की फिर दीवाना सा हुआ ये दिल तुम्ही से तो महकता है मेरी बगिया में हर एक गुल फिर न आई हमें मिलने विराना सा हुआ ये दिल 
(2) नहीं शेष कुछ रहा अब मजबूर हो गया हूँदाता कभी था मैं अब मजदूर हो गया हूँखुदखुशी से अपने लेता विदा मैं तुमसेबस राज की नीति का दस्तूर हो गया हूँ
(3) शख्शियत इश्क़ में मेरी यूँ बदनाम हो गईकरीब क्या आये वो हंसी ये शाम हो गईबिक जाते थे कभी जजबाद भी सस्ते में मेरेछूने से उनके मेरी हर चीज बेदाम हो गई
(4) सुनो जो गीत, गाऊं मैं, पढो अखबार हो जाऊँहो सजना औ सँवरना तो गुल ए गुलजार हो जाऊँतुम्हारे प्यार में बोलो तो मैं हर हद गुजर जाऊँरहो जो साथ तुम मेरे, तो नित इतवार हो जाऊँ
(5) पूरी हर एक आज उसकी इबादत हो गई देखोहाँ सरहद पे आज फिर एक शहादत हो गई देखोशहादत पे शहीदों की सियासत खेलने वालों कैसे एक माँ  किसी की आज भारत हो गई देखो
(6) चांद पूनम का गर आये तो *रजनी* सँवर जाएजो रूठा मीत घर आये तो *सजनी* सँवर जाएकिसानों औ जवानों पे सियासत बंद कर दो तुमजो मोदी फिर अगर आए तो *अवनी* सँवर जाए

(7) आँखों की शरारत भी सियासत बन गई देखोकिसानों की इबादत भी सियासत बन गई देखोबड़ा मुश्किल समझना है यहाँ हर राजनेता कोजवानों की शहादत भी सियासत बन गई देखो
(8)ली है शपथ आज राष्ट्रदेव का नित ध्यान धरेंगे हमआये पथ में जो कंटकी सब वो व्यवधान हरेंगे हमनिज मातृ-भू का *गान* भी जिनको नित लजाता हैखोज खोज कर विरुद्ध उनके शर संधान करेंगे हम
*______विविध जय*

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