“तो फिर क्यों आ रहे हो”–शिवांकित तिवारी “शिवा”

कविता शीर्षक:- “तो फिर क्यों आ रहे हो”

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Shivankit Tiwari 6:45 PM (44 minutes ago)

मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो,बताओं क्या जताने आ रहे हो,

तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन, तो फिर क्यों अब मुझे वापिस मनाने आ रहे हो,

क्यों पिंजरें में रखा था तुमने अब तक कैद करके,क्यों पिंजरें से मुझे अब तुम छुड़ानें आ रहे हो,
गिराया था मुझे तुमने कभी नीचा दिखाकर,तो फिर क्यों आज तुम ऊँचा उठाने आ रहे हो,
तुम्हीं ने था रुलाया मुझको पहले जख़्म देकर,तो अब क्यों जख़्म में मरहम लगाने आ रहे हो,
तुम्हीं ने तो कहा था तुम न कोई काम के हो,तो फिर क्यों आज मेरी उपलब्धियाँ गिनानें आ रहे हो,
मैं मतलब से नहीं मिलता न मतलब से मेरा रिश्ता,तुम्हीं थे मतलबी जो हाथ मुझसे फिर मिलाने आ रहे हो,
-©शिवांकित तिवारी “शिवा”
      युवा कवि एवं लेखक       सतना (म.प्र.)सम्पर्क:- 7509552096

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