तुम्हारे प्यार का आँचल—डा. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

तुम्हारे प्यार का आँचल, हमेशा सिर पे मेरा हो ।

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Praveen Kumar 12:00 PM (3 hours ago)
to me

मित्रों माँ को  समर्पित है मुक्तक ।

गुरूःब्रह्मा  गुरुःविष्णु  गुरूः देवा महेश्वरः ।

मित्रों माँ का स्वरूप  इन तीनों देवो मे प्रकाशित  होता है। समर्थन कीजिए।
तुम्हारे  प्यार का  आँचल, हमेशा सिर  पे मेरा हो।

तुम्हारे चरण कमलों पर , हमेशा  शीश मेरा हो।

खुशी  मिलती तुम्हे  मुझसे, खुशी  मिलती मुझे  तुमसे ।

तुम्हे  वंदन तुम्हे अर्पण , हमेशा  ध्येय  मेरा हो
डा. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, सीतापुर

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