“मौसम को बुलाने की सोचिये “–Sukhmangal Singh

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Sukhmangal Singh Apr 30, 2019, 5:05 PM (12 hours ago)
to me

“मौसम को बुलाने की सोचिये “———————————

मौसम को इशारों से बुलाने की सोचिये, 

रूठा हो गर तो उसे मनाने की सोचिये | 

जमाने में कोई दीवाना नहीं होता ,

मचलते दिल को भी मनाने की सोचिये | 

खत लिख दो अभी उसे एक प्यार का ‘मंगळ ‘

इस तन्हाई को रंगीन बनाने की सोचिये | 

जाग रहे तुम तो मुझे अच्छा नहीं लगता ,

अँधेरे की वही नींद चुराने की सोचिये | 

मौसमी मिजाज बढ़ चढ़ सुनाने की सोचिये ,

दिल के उजड़े ख्वाब को खिलाने की सोचिये || 

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