“तेरी वफादारी:-सिर्फ गद्दारी”– शिवांकित तिवारी “शिवा” 

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Shivankit Tiwari Tue, Mar 12, 7:34 PM (2 days ago)

तेरी उस अदा का हूँ मैं आज भी दीवाना,भूल नहीं सकता तेरा वो खूबसूरत मुस्कुराना,
हाँ सच में बस तुझे ही निहारना था मेरा काम,सांसें भी मैंने अपनी कर दी थी तेरे ही नाम,
मैने अपनी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत गुनाह किया था,तभी तो सौंप दी थी जिंदगी तुम्हें और,तुमनें बस मुझको तबाह किया था,
तुमनें जो किये थे वादें और खायी थी जो कसमें,मैंने तो उन्हें किया था पूरा और निभाई थी सारी रस्में,
तुम्हारा वो चेहरा बदलने का हुनर लाजबाब था,मेरा काम बस इश्क करना जो तुमसे बेहद बेहिसाब था,
तुम्हारी कहीं हुई हर बातों पे आँख बन्द विश्वास करता था,सच में पागल था प्यार में तुम्हारे बस तुम्हें खोने से डरता था,
बेखौफ हो के तुम मुझे यू लूट रही थी,कि मैं बस जिंदा दिखता रहा था मगर साँस टूट रही थी,
रंगत बदल गयी थी मेरी तुम्हारी संगत पाकर,कि जैसे इश्क़ की मेंहदी अब धीरे-धीरे छूट रही थी,
खुद का ध्यान ही न था इतना धुत्त था तुम्हारें प्यार में,कई हप्ते बिना सोये ही गुजारा देता था तुम्हारें इन्तजार में,
खुदा मान बैठा था तुम्हें जैसे अब जीना तुम्हारें बिना आसान नहीं,निकाल दिया दिल से तुम्हें प्यार के काबिल नहीं तुम अब,मेरे दिल मे नफरत के लिये भी तुम्हारें अब बचा स्थान नहीं,
-©शिवांकित तिवारी “शिवा”     युवा कवि एवं लेखक            सतना (म.प्र) संपर्क:-9340411563

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