“मंगलगीत गवाई “–Sukhmangal Singh


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Sukhmangal Singh 9:28 AM (9 hours ago)
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“मंगलगीत गवाई “जालिम सर चढ़ बोल रहा है बंदूकों के साये में वन्देमातरम में कब तक हम  कौम को जगायेंगे | नरमुण्ड माला वाली माँ, कितना उसे दिखाएँगेखून के प्यासे कातिल भरमाते आएंगे भरमाएंगे ||
तीर -त्रिशूल पे कहाँ तक विषधर का थूक लगाएंगे जवान खड़ा भारत मेरा कब हम जयहिंद जाएंगे | माना युद्ध भूमि पर शहादत देने से स्वर्ग पाना है  वीर शहीदों के शान में वन्देमातरम गाये जाएंगे ||
केशरिया बाना वीरों के रणभेरी रण  में  बजायेंगे शहीदों को गीत समर्पित हिन्द से  लिखते  आये |  देश पर मरने वालों श्रद्धा सुमन अर्पित करते आयेवन्देमातरम में कब तक हम  कौम को जगायेंगे || 

हिन्दू- मुस्लिम सिक्ख- ईसाई माना भाई -भाई त्राहि-त्राहि मची विश्व में हरहद पार बढ़ी कठिनाई माँ काली का आवाहन ‘मंगळ होगा मंगल सुखदाई वन्देमातरम से दुश्मन को दुःख हो तो हो दुखदाई || 
नौकरशाही का बढ़ता  जुल्म देख पूरी प्रजा घबराईअबतो सन्नाटे में गूँज देख देख रही  हैं माई – ताई |मूछें बड़ी – खड़ी – कड़ी रखते आये हैं मेरे  दादा- भाई वन्देमातरम में कब तक हम  कौम को जगायेंगे || 
फुलवा – सोनवा की टाठी में सबने ही जेवना खाई मुछमुंडों के हाथों में जब से देश की व्यवस्था आई |  वन्देमातरम गीत पर ओ निरंकुश अंकुश सा लगाईंवन्देमातरम से दुश्मन को दुःख हो तो हो दुखदाई || 
वीर तुम बढे चलो धीर तुम बढे चलो दहाड़ सिंह लायें और जननी के गौरव की अविरल गाथा मिल गायें संसद की दहलीज पर यह मंगल तिरंगा गीत गवाई  
वन्देमातरम में कब तक हम  कौम को जगायेंगे ||-सुखमंगल सिंह ,वाराणसी ,मोबाइल ९४५२३०९६११   

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