‘दरियागंज की किताबी शाम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित’

देश की राजधानी में गौरवशाली पुस्तक परंपरा के मुख्य प्रकाशन गृह वाणी प्रकाशन के डॉ प्रेमचंद ‘महेश’ सभागार में ‘दरियागंज की किताबी शामकार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी का स्वागत करते हुए वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि दक्षिण एशिया के सबसे बड़े और पुराने किताबी गढ़ ‘दरियागंज’ का विस्मृत साहित्यिक कलेवर जिसमे जयशंकर प्रसाद, नागार्जुन, हजारीप्रसाद द्विवेदी, नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह, राजेन्द्र यादव, ममता कालिया, अनामिका, चित्रा मुद्गल जैसे साहित्यिक हस्ताक्षर दर्ज हैं, फिर से एक बार विचारों की ऊष्मा से स्पंदित करने के लिए तयार किया जा रहा है । पहल है वाणी प्रकाशन की जिसमे एक नयी विचार श्रृंखला ‘ दरियागंज की किताबी शाम’ का आज पहला कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर वाणी प्रकाशन के मुख्य कार्यालय में हुआ । शृंखला की पहली कड़ी  ‘जेंडर लेंस, उत्तर आधुनिक समय और उसके प्रश्न’ में वक्ताओं ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखें।

प्रवीण कुमार ने कहा कि स्त्री विमर्श उत्तर आधुनिकता का छत्तीस का आंकड़ा है ।  उत्तर आधुनिकता अपने बहुआयामी विमर्श में महिलाओं का महिलाओं पर ही टिप्पणी करना स्त्री विमर्श नहीं मानता ।  उत्तर आधुनिकता नये ढंग से स्त्री -विमर्श को परिभाषित करता है और बाकी विमर्शों को स्पेस देने की बात करता है।

उमाशंकर चौधरी ने कहा वह बड़े-बड़े “वादों” यानि विचारधाराओं को बहकाने की बातें मानते हैं । सूक्ष्म स्तर पर भारतीय परिवारों में भेदभाव जिसमे स्त्री को पुरुष जितने मौके नहीं मिलते । इसके बावजूद पुरुष बदल रहा है और स्त्री की खुशी में आपनी खुशी ढूंढ रहा है । यही प्रेम कि नीव भी है।

मेरी पत्नी पूछती है कि प्याज है घर में और लोग हम मुस्कुराते हुए एन्जॉय करते है।

रजत रानी ‘मीनू’ ने कहा दलित तो आधुनिक ही नहीं हुआ। वह अभी अन्तिम पायदान पर है। डॉ. अम्बेडकर का कहना था स्त्री शिक्षा से ही स्वाबलंबी बनेगी। श्रमिक महिलाएँ आज भी उसी पिछड़ी स्थिति में है। दलित पर्वों की मध्यम वर्गीय महिलाओं को भी यह पता नहीं कि 8 मार्च या महिला दिवस क्या है ।  हिन्दू कोड बिल आज भी लागू नहीं । उत्तर आधुनिकता कहाँ है जब स्त्री अब भी अस्तित्व में नहीं है, आधुनिक ही नहीं है।

नीलिमा चौहान ने कहा –फेमिनिज्म़ शब्द को नकार कर हमारे विमर्श से भटक सकते हैं। डिस्कोर्स से बच रहे लेखक परिपक्व नहीं है।

प्रतिष्ठित इस अवसर पर की मुख्य जिनमें साक्षी सुदीप सेन अपने विचार रखे । उन्होने मीटू आंदोलन के एक तरफ़ा होने पर अपनी राय राखी । हावर्ड यूनिवरसिटि के दक्षिण एशिया सेंटर के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि गाँव, देहात में स्त्रीयों ने एकजुट हो बड़े आंदोलन सार्थक किए हैं । श्यौराज सिंह बेचैन, गीताश्री, अजय सिंह, विजय श्री तनवीर, अरूण माहेश्वरी, अदिति माहेश्वरी-गोयल कार्यक्रम में उपस्थित थे ।

वाणी प्रकाशन के बारे में…

वाणी प्रकाशन 56 वर्षों से 32 साहित्य की नवीनतम विधाओं से भी अधिक में, बेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा है। वाणी प्रकाशन ने प्रिंटइलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। वाणी प्रकाशन ने देश के 3,00,000 से भी अधिक गाँव, 2,800 क़स्बे, 54 मुख्य नगर और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। 

वाणी प्रकाशन भारत के प्रमुख पुस्तकालयों, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य पूर्व, से भी जुड़ा हुआ है। वाणी प्रकाशन की सूची में, साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत 18 पुस्तकें और लेखक, हिन्दी में अनूदित 9 नोबेल पुरस्कार विजेता और 24 अन्य प्रमुख पुरस्कृत लेखक और पुस्तकें शामिल हैं। वाणी प्रकाशन को क्रमानुसार नेशनल लाइब्रेरी, स्वीडन, रशियन सेंटर ऑफ आर्ट एण्ड कल्चर तथा पोलिश सरकार द्वारा इंडो, पोलिश लिटरेरी के साथ सांस्कृतिक सम्बन्ध विकसित करने का गौरव सम्मान प्राप्त है। वाणी प्रकाशन ने 2008 में ‘Federation of Indian Publishers Associations’ द्वारा प्रतिष्ठित ‘Distinguished Publisher Award’ भी प्राप्त किया है। सन् 2013 से 2017 तक केन्द्रीय साहित्य अकादेमी के 68 वर्षों के इतिहास में पहली बार श्री अरुण माहेश्वरी केन्द्रीय परिषद् की जनरल काउन्सिल में देशभर के प्रकाशकों के प्रतिनिधि के रूप में चयनित किये गये।

लन्दन में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा 25 मार्च 2017 को वातायन सम्मान तथा 28 मार्च 2017  को वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक व वाणी फ़ाउण्डेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी को ऑक्सफोर्ड बिज़नेस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में एक्सीलेंस इन बिज़नेस  सम्मान से नवाज़ा गया। प्रकाशन की दुनिया में पहली बार हिन्दी प्रकाशन को इन दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। हिन्दी प्रकाशन के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना मानी जा रही है।

3 मई 2017 को नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘64वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के कर-कमलों द्वारा स्वर्ण-कमल-2016’ पुरस्कार प्रकाशक वाणी प्रकाशन को प्रदान किया गया। भारतीय परिदृश्य में प्रकाशन जगत की बदलती हुई ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने राजधानी के प्रमुख पुस्तक केन्द्र ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर के साथ सहयोग कर ‘लेखक से मिलिये’ में कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम-शृंखला का आयोजन किया और वर्ष 2014 से हिन्दी महोत्सव का आयोजन सम्पन्न करता आ रहा है।

वर्ष 2017 में वाणी फ़ाउण्डेशन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित इन्द्रप्रस्थ कॉलेज के साथ मिलकर हिन्दी महोत्सव का आयोजन किया। व वर्ष 2018 में वाणी फ़ाउण्डेशनयू.के. हिन्दी समितिवातायन और कृति यू. के. के सान्निध्य में हिन्दी महोत्सव ऑक्सफोर्ड, लन्दन और बर्मिंघम में आयोजित किया गया ।

‘किताबों की दुनिया’ में बदलती हुई पाठक वर्ग की भूमिका और दिलचस्पी को ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने अपनी 51वी वर्षगाँठ पर गैर-लाभकारी उपक्रम वाणी फ़ाउण्डेशन  की स्थापना की। फ़ाउण्डेशन की स्थापना के मूल प्रेरणास्त्रोत सुहृदय साहित्यानुरागी और अध्यापक स्व. डॉ. प्रेमचन्द्र महेश  हैं। स्व. डॉ. प्रेमचन्द्र‘महेश’ ने वर्ष 1960 में वाणी प्रकाशन  की स्थापना की। वाणी फ़ाउण्डेशन का लोगो विख्यात चित्रकार सैयद हैदर रज़ा द्वारा बनाया गया है। मशहूर शायर और फ़िल्मकार गुलज़ार वाणी फ़ाउण्डेशन के प्रेरणास्रोत हैं।

वाणी फ़ाउण्डेशन भारतीय और विदेशी भाषा साहित्य के बीच व्यावहारिक आदान-प्रदान के लिए एक अभिनव मंच के रूप में सेवा करता है। साथ ही वाणी फ़ाउण्डेशन भारतीय कला, साहित्य तथा बाल-साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय शोधवृत्तियाँ प्रदान करता है। वाणी फ़ाउण्डेशन का एक प्रमुख दायित्व है दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी बड़ी भाषा हिन्दी को यूनेस्को भाषा सूची में शामिल कराने के लिए विश्व स्तरीय प्रयास करना।

वाणी फ़ाउण्डेशन की ओर से विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार दिया जाता है। यह पुरस्कार भारतवर्ष के उन अनुवादकों को दिया जाता है जिन्होंने निरन्तर और कम से कम दो भारतीय भाषाओं के बीच साहित्यिक और भाषाई सम्बन्ध विकसित करने की दिशा में गुणात्मक योगदान दिया है। इस पुरस्कार की आवश्यकता इसलिए विशेष रूप से महसूस की जा रही थी क्योंकि वर्तमान स्थिति में दो भाषाओं के मध्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाले की स्थिति बहुत हाशिए पर है। इसका उद्देश्य एक ओर अनुवादकों को भारत के इतिहास के मध्य भाषिक और साहित्यिक सम्बन्धों के आदान-प्रदान की पहचान के लिए प्रेरित करना है, दूसरी ओर, भारत की सशक्त परम्परा को वर्तमान और भविष्य के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित करना है।

वाणी फ़ाउण्डेशन की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है भारतीय भाषाओं से हिन्दी व अंग्रेजी में श्रेष्ठ अनुवाद का कार्यक्रम। इसके साथ ही इस न्यास के द्वारा प्रतिवर्ष डिस्टिंगविश्ड ट्रांसलेटर अवार्ड भी प्रदान किया जाता है जिसमें मानद पत्र और एक लाख रुपये की राशि अर्पित की जाती हैं। वर्ष 2018 के लिए यह सम्मान प्रतिष्ठित अनुवादक, लेखक, पर्यावरण संरक्षक तेजी ग्रोवर को दिया गया है।

विस्तृत जानकारी के लिए हमें ई-मेल करें Marketing@vaniprakashan.in

या वाणी प्रकाशन के इस हेल्पलाइन नम्बर पर सम्पर्क करें : +919643331304

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