श्रीमद्भागवत महापुराण से—सुखमंगल सिंह

प्रकाशनार्थ – श्रीमद्भागवत महापुराण से

Inboxx
Sukhmangal Singh 7:19 AM (3 hours ago)
to me

श्रीमद्भागवत महापुराण से   – श्रीमद्भागवत महा पुराण श्लोक १३ पृष्ठ १७४ अंक १ तृतीय स्कन्द ” दुष्ट को कैसे त्यागें”श्लोक २३ पृष्ठ १६६  अंक ८ “तपस्या ही सबकुछ है ” श्लोक १९  पृष्ठ १६५  अंक ८ ” प्रभु ने ब्रह्मा से कहा कपट युक्त मनुष्य हमें नहीं प्राप्त करता ” श्लोक १९ पृष्ठ २२१  अंक१२ तृतीय स्कन्द “तप से मनुष्य सुगमता से प्रभु को प्राप्त करता है “श्लोक २६ पृष्ठ ९६ अंक १३ ” उत्तम पुरूष कौन होते ” श्लोक २५ -वही -“धीर कौन होते “श्लोक २४ पृष्ठ १०६ अंक १५ ” लोग पालन पोषण करते हैं और मार डालते हैं” श्लोक ४ पृष्ठ ११८  अंक १८ ” अंतकाल में मोह होता जो भगवान् की कथा सुनते हैं ” श्लोक ३२ पृष्ठ  ६२ श्रीमद भागवत महा पुराण में वर्णन पढ़ें तीनों तापों की औषधि क्या है श्रीमद्भागवत महा पुराण श्लोक १३ पृष्ठ १७४ अंक १ तृतीय स्कन्द ” दुष्ट को कैसे त्यागें”श्लोक २३ पृष्ठ १६६  अंक ८ “तपस्या ही सबकुछ है ” श्लोक १९  पृष्ठ १६५  अंक ८ ” प्रभु ने ब्रह्मा से कहा कपट युक्त मनुष्य हमें नहीं प्राप्त करता ” श्लोक १९ पृष्ठ २२१  अंक१२ तृतीय स्कन्द “तप से मनुष्य सुगमता से प्रभु को प्राप्त करता है ” श्लोक १५-१९ पृष्ठ २०१-२०२ “कैसे प्रभु में मन लगता है “श्लोक २६ पृष्ठ ३१४ “प्रभु सब कुछ है ” श्लोक ३०पृष्ठ ३१४ अंक ३२ “ब्रह्म रूप में कौन देख सकता है ” |श्रीमद्भागवत महापुराण  कलिकाल में अमृत के समान , मुक्ति दिलाने वाला है | भगवान् ने कहा- श्लोक ९ पृष्ठ ४५६ अंक ३० चतुर्थ स्कन्द से  प्रचेताओं ! जो मनुष्य सायंकाल प्रति दिन तुम्हारा स्मरण करेगा ,उसका अपने भाइयों में अपने सामान प्रेम होगा तथा उसमें समस्त जीवों के प्रति मित्रता का भाव हो जाएगा | 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook
Twitter
LinkedIn
INSTAGRAM