प्यार का गीत—अनिल कुमार

प्यार का गीत
मैं तुम बन जाऊँ, तुम मैं बन जाओ
मैं तुम को चाहूँ, तुम मुझ को चाहो
प्यार में मैं और तुम , हम हो जाएँ
इक होकर हम.तुम , प्यार में खो जाएँ
फिर मैं न सोचूँ , तुम न सोचो
इस कदर इक.दूजे में हम खो जाएँ
प्यार की इस मौज में हम , हमदम हो जाएँ
मैं तुम को चाहूँ , तुम मुझ को चाहो
प्यार का ऐसा कोई गीत दोनों मिलकर गाएँ
तुम उसका सूर बन जाओ , मैं संगीत बन जाऊँ
तुम भी प्यार में खो जाओ , मैं भी खो जाऊँ
प्यार के इस सागर में तेरे संग मैं भी डूब जाऊँ
तेरे मन में मैं और मेरे मन में तुम बस जाओ
मैं तुम बन जाऊँ , तुम मैं बन जाओ
मैं तुम को चाहूँ , तुम मुझ को चाहो
प्यार में तोता.मैना बनकर दूर गगन में उड़ जाएँ
फिर तुम न लोटो , मैं भी लोट के वापस न आऊँ
तुम और मैं कहीं दूर प्यार का आशियाना बनाएँ
बस तुम मुझ को चाहो , मैं बस तुम को चाहूँ
कुछ तुम दिल धड़काओ , कुछ मैं दिल धड़काऊँ
तुम मुझ से ना दूर हो , न मैं तुझ से दूर जाऊँ
संग संग दोनों मिलकर प्यार का संगीत बजाएँ
कुछ तुम मुस्कुराओ , कुछ मैं मुस्कुराऊँ
कुछ तुम शरमाओ , कुछ मैं भी शरमाऊँ
प्यार में इस दुनिया को हम दोनों भूल जाएँ
तुम मुझ से प्रीत लगाओ , मैं तुम से प्रीत लगाऊँ
मैं तेरी दुनिया बनूँ , तुम मेरी दुनिया बन जाओ
मैं तुम को चाहूँ , तुम मुझ को चाहो
मैं तुम बन जाऊँ , तुम मैं बन जाओ।

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