पंतजी को संगीत और साहित्य का शौक–Vishwanath Shirdhonkar‎

-पंतजी को संगीत और साहित्य का बड़ा शौक था । कुछ वर्ष पहिले तक उनकी बैठक की शोभा हुआ करता था यह ग्रामोफोन । साहित्यकारों और कवियों की महफ़िल भी बैठकों में हमेशा सजी रहती । मराठी के प्रसिद्ध कवी राजकवि भास्कर रामचंद्र तांबे के षष्टिपूर्ति समारोह के लिए सन १९३३ में जो समिति बनी थी और जिसके अध्यक्ष तत्कालीन देवास पाती-२ के महाराजा श्रीमंत सदाशिवराव खासेसाहेब पंवार थे और जिनके षष्टिपूर्ति समारोह के प्रमुख अतिथि तत्कालीन ग्वालियर नरेश थे उस तांबे षष्टिपूर्ति समारोह समिति की कार्यकारिणी में एक महत्वपूर्ण सदस्य थे पंतजी । पर अब ये सारी बाते बीस वर्ष से भी ज्यादा पुरानी है । अब तो पंतजी का स्वास्थ भी बहुत खराब रहता है । पर एक बात इससे सिद्ध होती है की पंतजी अपनी उम्र के पिछहत्तर वर्ष तक बहुत सक्रीय थे । पर अब यह ग्रामोफोन भी खराब है और बंद पडा है । अब इस बाड़े में पंतजी की बैठक में न पुराने गाने सुनाई देते है ना बैठक में साहित्यकारों और कवियों का जमघट ही होता है । और इस ग्रामोफोन की बदनसीबी देखिये अटाला समझ कर इस ग्रामोफोन की रवानगी नानाजी के कमरें में की गयी और उसे एक तरफ कोने में रख दिया गया । -नानाजी तो साहित्य और संगीत से कोसो दूर थे । गणित के जो मास्टरजी थे । उनके लिए ये छत्तीस इंच लकड़ी का ऊंचा बक्सा किसी काम का ही नहीं था बल्कि उनके लिए वास्तव में यह अटाला ही था । इसलिए वे इसका इस्तेमाल , छोटीमोटी चीजे रखने के लिए करते । पर उनके पास कहने के लिए छोटीमोटी चीजे भी बहुत ही कम होती । उनकी चीजे मतलब एक काली टोपी , शेरछाप बीडी बण्डल , विमको छाप माचिस की डब्बी और कुछ वस्तुएं । और विमको दंतमंजन की कांच की खाली शीशी । इसमें मिटटी का तेल भरा हुआ । अब आप पूछेंगे ये क्यों ? तो इस लिए कि खटमल पकड़ना और उसे शीशी में डालना ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *