प्राण वायु—सुखमंगल सिंह

प्राण वायु

Sukhmangal Singh

2:18 AM (16 hours ago)

मातु -पिता धर्म गुरु

पावन धरा धरनि के !
प्रकट कृपाला हैं कहते
कल्प गर्भ धारण करके |
भौतिक जग कहते आया
जन्म शिशु लेते रहते
नाशवान निश्चित सबके
जन्म लिए जो भी दिखते |
सभी दुःख सह प्रकट होते
पर पुत्र किसी का कहते
अमर  नहीं काया नश्वर
शास्त्र वेद सब कहते |
जैसा कर्म जो करते
उसे वैसा फल भी मिलते
तन माध्यम केवल होता
जीव-जंतु प्रकट होते !
पांच तत्व की यह शरीर
मिल पांच तत्व में जाती
प्रकट जिसे जीव  प्राण कहते
प्राण वायु में मिल जाते ||

-सुखमंगल सिंह

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