– ‘जन्म तारीख ? ‘—-Vishwanath Shirdhonkar

– ‘जन्म तारीख ? ‘ – ‘ पता नहीं .’देवकीनंदन मुनीम सर खुजाते हुए बोले , ‘ पर देश को आजादी मिली थी या मिलने वाली थी उसके बाद ही पैदा हुआ है यह इतना भर मुझे पता है । ‘ – ‘ मतलब सन सैतालिस ? पर तारीख और महिना भी तो लिखना पड़ेगा ? ‘ लक्ष्मण मास्टरजी ने पूछा । – ‘ अरे तारीख का क्या लेकर बैठे हो ? क्या फर्क पड़ता है ? तारीख आज की लिख लो । ‘ -देवकीनंदन मुनीम को वैसे भी मेरे जन्म से या जन्म तारीख से क्या फर्क पड़ने वाला था ? लक्ष्मण मास्टरजी लिखते लिखते रुक गए , ‘ अरे , महीना रह गया ना ? रजिस्टर पूरा भरना पड़ेगा मुझे । सरकारी काम है । ‘ – अच्छा सरदर्द है । अब मुझे क्या मालूम तारीख ना महीना ? ऐसा मालूम होता तो जन्मपत्री ले आता । मेरे को पंतजी बोले इसको लक्ष्मण के पास छोड़ कर आओं। यहां तुम मेरे से जाने क्या क्या पूछ रहे हो ?’ देवकीनंदन मुनीम लक्ष्मण मास्टरजी पर नाराज हो गए । – ‘ लिखना तो पड़ेगा। ‘ लक्ष्मण मास्टर जी ने अपनी मज़बूरी बतायी । -‘ हाँ याद आया उस दिन दत्त जयंती थी । मतलब मार्गशीष की पूनो लिखो दिसम्बर महीना। ‘ देवकीनंदन मुनीम विजयी मुद्रा में बोले । -देवकीनंदन मुनीम भले खुश हुए हो पर उन्होंने सरकारी दरबारी खाते में मेरी जिन्दगी का एक साल से ज्यादा समय कम कर दिया। वैसे भी क्या महत्व था उनकी जिन्दगी में मेरा ? लोगों के लिए भी मेरा क्या महत्व था ?

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *