गीत में संचेतना के स्वर हमें दो शारदे !—अनुराग ‘अतुल’

गीत में संचेतना के स्वर हमें दो शारदे !
विश्व के नवजागरण का वर हमें दो शारदे!

गा उठे कोयल वसन्ती
गान जन-मन के विटप पर।
बज उठे सत्यम शिवम की
धुन धरा पर शुभ्र-भास्वर!
छू सकें आकाश , ऐसे पर हमें दो शारदे!

मेट दो अन्याय जग से
न्याय का सत्कार कर,
छाँट दो कोहरा हृदय से
ज्ञान का उजियार कर।
नेह का निर्झर बहे , वह उर हमें दो शारदे!

कुछ करो ऐसा कि इस
आतंक से सब मुक्त हों,
द्वेष, ईर्ष्या, छल, कपट,
पाखण्ड से उन्मुक्त हों।
शांतिमय वातावरण का घर हमें दो शारदे !

दीन का उत्थान कर दे,
अश्रु पर उपकार कर,
गाँधी के पावन, महात्मा
स्वप्न को साकार कर!
माध्यम हम बन सकें, वो कर हमें दो शारदे !

@ अनुराग ‘अतुल’

 

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