सबेरा(बालगीत) —-शशांक मिश्र भारती

सबेरा—-शशांक मिश्र भारती

 

हुआ सबेरा चिड़िया चहकीं

जागो बच्चों और आंखें खोलो

निकल स्वप्न लोक से बाहर

जल्दी से अपना मुंह धोलो

नित्य कर्मों से शीघ्र निपट लो

मां से लेकर कुछ खा लो

और उठाओ बस्ता अपना

जल्दी से विद्यालय जाओ

वहां पढ़ो तुम मन लगाकर

आओ घर जब छुट्टी हो

खाओ-पीओ, मौज मनाओ

और गृहकार्य फिर कर लो।

 

उपरोक्त दोनों बालगीत मेरे अपने नितान्त मौलिक स्वरचित व किसी भी अन्तरजाल पर अब तक अप्रकाशित हैं।

शशांक मिश्र भारती

हिन्दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर उ0प्र0242401

मोबा. 9410985048 9634624150

bZesy %&Shashank.misra73@rediffmail.com

 

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