भज गोविन्दम(गीत) —-सुशील शर्मा

Sushil Sharma

3:27 PM (3 hours ago)
to me
भज गोविन्दम(गीत)
सुशील शर्मा
भज गोविन्दम राधे राधे
जीवन की नैया को साधे
भज गोविन्दम राधे राधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।
जीवन रूप विषम अनुरूपा
सुख दुख कष्ट विपत्ति कूपा।।
कुछ पल हंसी आंसू पल दूजे।
प्रभु को जप प्रभु पद को पूजे।।
मोक्ष मिले जो उनको साधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।।
भज गोविन्दम राधे राधे।
रिश्ते नाते सब क्षण भरके।
स्वार्थ निहित सब बातें करते।
सुख में सब साथी बन जाते।
दुख में कोई पास न आते।
भज ले प्रभु को मन में साधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।
बचपन के सुख बीत गए अब।
यौवन सुख में रीत गए सब।
माया मोह में उम्र गुज़ारी।
मृत्यु कहे अब तेरी बारी।
चरण पकड़ अब प्रभु को साधे
भज गोविन्दम राधे राधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।
मात पिता से तन ये पाया।
कभी न उनको शीश झुकाया।
गुरु के ज्ञान को व्यर्थ गंवाया।
अंत समय अब मन घबड़ाया।
मन को अब प्रभु चरनन बांधे
भज गोविन्दम राधे राधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।
अंत समय जब आया भाई।
संग न रिश्ते न धन न कमाई।
छोड़ छाड़ दुनिया का मेला।
हंसा चला है निपट अकेला।
पुण्य पाप सब गठरी बांधे।
भज गोविन्दम राधे राधे।
भज गोविन्दम राधे राधे

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