“ये जीवन है” —शबाना के. अर्रिफ़

Shabana K Aarif

9:33 PM (14 hours ago)

“ये जीवन है” लेखक : शबाना के. अर्रिफ़
ये जीवन है असाधारण नहीं होता जी लेना

किसी के प्यार में उसका हो कर जी लेना

उसके दिल के टुकड़ों को अपना लेना

जीवन की जंग में ये विजय नहीं होती

पेट की भूख, भौतिक सुख इससे परे होते हैं

\प्रेम और संवेदनाएं सब तुच्छ हो जाती हैं.

सब कुछ छोड़कर चाँद और चाँद के टुकड़ों के लिए

एक प्रेम की दुनिया का सपना पल में

खंडित हो जाता है ना चाँद तुम्हारा

ना उसके वो टुकड़े जिन्हें तुमने सीने से लगाया

अपने भविष्य का सपना उनमे देखा

वही टुकड़े चाँद होकर तोड़ देते है पैरों तले

भविष्य के एक-एक सपने को और हम

रह जाते हैं संवेदनाओं की धरातल पर

अपने अकेले अस्तित्व को समेटे एक ठूंठ की भांति

अतीत में दुखाये दिलों की दी चोटों के

आभास में डूबे, अपनी संवेदनाओं की चोटों को

अकेलेपन के अश्रुधारा में भिगोते हुए

जीवन का सार समझाते हुए स्वयं को

ये जीवन है, असाधारण नहीं होता जी लेना

किसी के प्यार में उसका हो कर जी लेना

(इस स्व:लिखित रचना के लेखक टीवी और फ़िल्म लेखक के रूप में जाने जाते हैं.)

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