मंजिले बहुत है अफ़साने बहुत —Sanchita Lahiri

मंजिले बहुत है अफ़साने बहुत है,
राहे जिन्दगी में इम्तेहान आने बहुत है,
मत करो गिला उसका जो मिला नहीं,
इस दुनिया में खुश रहने के बहाने बहुत है !!

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