“तीर्थराज प्रयाग “—-Sukhmangal Singh

“तीर्थराज प्रयाग “
तीर्थराज प्रयाग में पावन त्रिवेणी तट पर आस्था का मेला सज गया है। प्रयाग- इलाहाबाद में गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती संगम पर अवस्थित एक तीर्थ स्थल है | गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती की धाराओं का  संगम है तीर्थराज प्रयाग | आत्मशुद्धि का प्रयास है प्रयाग | मर्यादा पुरुषोत्तम राम द्वारा भारद्वाज मुनि से परामर्श के उपरान्त वनगमन यात्रा में आगे बढ़ने का तीर्थ स्थल   है प्रयाग | राक्षसों के बिनाश और लंका विजय के बाद राम द्वारा अपने पिता चक्रवर्ती राजा दसरथ की श्राध्य स्थली है प्रयाग | पांडवों की वनगमन  स्थली है प्रयाग | पान्डेश्वर महादेव जहा पांडव रहे द्वापर में वह पुनीत स्थल है प्रयाग |  वनगमन,वनवास के समय श्रीराम और पांडव जहां रहे थे वह पुनीत जगह है प्रयाग | भगवान्  बुद्ध और  महावीर स्वामी की परम्परा के स्वामियों का  तपस्थली है प्रयाग | हिन्दुओं की श्रद्धा स्थली  है प्रयाग | अक्षयवट स्थल है प्रयाग | गंगा और यमुना की रेती में वसा प्रयाग |

यहाँ स्नान करने पर  मोक्ष दायक है प्रयाग | प्रयाग की महिमा का वर्णन, गुणगान ,गायन-भजन , स्पर्श मात्र से मुक्ति देने वाला है प्रयाग | मत्सपुराण,ऋग्वेद ,रामचरित्र मानस आदि ने भी वर्णन किया है प्रयाग का |

मेले का मुख्य आकर्षण हैं कल्पवासी। माना जाता है कि, प्रयाग में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होने वाले एक मास के कल्पवास से एक कल्प (ब्रह्मा का एक दिन) का पुण्य मिलता है।
धैर्य, अहिंसा व भक्ति का प्रतीक कल्पवास पौष पूर्णिमा (दो जनवरी)२०१८  स्नान पर्व से आरंभ हो गया है , जो माघी पूर्णिमा तक चलेगा, जबकि कुछ श्रद्धालु लोग मकर संक्रांति से कुंभ संक्रांति तक कल्पवास करते हैं।
प्रयाग में हर वर्ष माघ मेला लगता है। यहां दूर दराज से स्नान, तप करने वाले , साधु-संत और श्रद्धालु आते हैं। साथ ही यहां कल्पवासी भी पहुंचते हैं जो पूरे एक माह तक तम्बुओं में रह कर जप-तप और ध्यान करते हैं। अलग अलग पंडों के कैम्प में पंथानुशार रहते हैं | आदिकाल से चली आ रही इस परंपरा के महत्व की चर्चा वेदों से लेकर महाभारत और रामचरित मानस में अलग-अलग नामों से मिलती है। आज भी कल्पवास नई और पुरानी पीढ़ी के लिए आध्यात्म की राह का एक पड़ाव है। धार्मिक ग्रंथों में भी प्रयाग महिमा ,पौष पूर्णिमा ,मकर संक्रांति ,कुम्भ वर्णन का उल्लेख लीलता है |
 तीर्थराज प्रयाग महर्षि भारद्वाज, दुर्वासा और  अत्रि ऋषि की तपोस्थली भी  रही है, लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि इस पावन धरा को श्री गुरुतेग बहादुर तथा खालसा पंथ के संस्थापक अध्यात्म, काव्य व शौर्य पराक्रम के प्रतीक गुरु गोविंद सिंह के जीवन दर्शन से जुड़ने का भी गौरव प्राप्त रहा। यहीं सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह, प्रकाश (मां के गर्भ) में आए।
 समूची दुनिया में यह इकलौती ऐसी पीठ है जो दस महाविद्याओं में अंतिम व परम सिद्धि के वाहक श्री यंत्र पर अवस्थित है। पुराणों में वर्णित इक्यावन शक्तिपीठों में इलाहाबाद का ललिता देवी धाम विशिष्ट स्थान रखता है। गंगा-यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी के तट पर बसे इस धाम में शिवप्रिया सती के दाहिने हाथ की तीन उंगलियां गिरने से देवी यहां राज राजेश्वरी त्रिपुर सुन्दरी रूप में विद्यमान हैं।
प्रयाग के प्राचीन स्थलों में वट माधव ,शंख माधव ,गदा माधव ,अति माधव ,मनोहर माधव ,चक्र माधव ,तपोकुंड,सूर्यतंकेश्वर मंदिर ,इन्द्रवन ,उर्वशी तीर्थ ,शंख नाग आदि प्राचीन स्थल है |
प्रयाग क्षेत्र में त्रिदेव और आदिशक्ति निवास ,किला देखकर श्रद्धालु महावीर के लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन पूजन करते हैं | लोगों द्वारा कहा जाता कि इस कलिकाल में भी बारिस के मौसम में क्षण भर को ही सही, गंगा -यमुना का जल  हनुमान जी के पास तक पहुँचती हैं | इस क्षण को देखने के लिए लोग बेसब्री से इन्तजार करते हैं |


Sukhmangal Singh

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