कह – मुकरी——–डॉ. रंजना वर्मा

कह – मुकरी
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अपने मन की नित्य चलावै
अवसर पावत मोहिं सतावै
सहे न जायें वा के तेवर ।
का सखि , साजन ? ना सखि , देवर ।।1
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बिन पेंदी लोटा सी डोले
सीधे मुख कबहूँ नहिं बोले
रहे हमेशा मो सँग झगरी ।
का सखि , ननदी ? ना सखि , गगरी ।।2
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पहले  मन  मे  भाव  जगावे
बात कहे कहि के नटि जावे
काह कहूँ सखि , अब तो झुक री
का सखि , साजन ? ना सखि , मुकरी ।।3
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गहन विपिन में रास रचावे
कर ले  मुरली मधुर बजावे
नित्य करे इच्छा का दोहन ।
का सखि , साजन ? ना सखि , मोहन ।।4
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सदा प्रीति की बोली बोले
हृदय कुंड में मधुरस घोले
वा बिन सूनी लगे वाटिका ।
का सखि , साजन ? नहीं , राधिका ।।5
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नित्य चलावै नयन दुधारी
वाणी  उर  में  लगे  कटारी
नखरा करि करि ढारइ आँसू ।
का सखि , साजन ? ना सखि , सासू ।।6
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मंगल  कारज   सदा  करावै
वा के बिन शुभ काम न भावै
ऊपर   सुन्दर   अंदर   पोल ।
का सखि , साजन ? ना सखि , ढोल ।।7
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बिन वाके सर ऐसे घूमे
जैसे गगन धरा को चूमे
वाके बिना न कछू सुहाय
का सखि , साजन , ना सखि , चाय ।।8
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रात हुए नयनों में आया
कभी रुलाया कभी हँसाया
वैरी जैसा फिर भी अपना ।
का सखि, साजन ? ना सखि सपना ।।9
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वो आवै तो रूप सजावै
वा के बिन सिंगार न भावै
वा के बिन मैं कहीं गयी ना ।
का सखि , साजन ? नहीं आईना ।।10
जब अँधियारा मन डरपावै
बाँह थाम हर वस्तु दिखावै
बिन वा के काँपत है हिया ।
का सखि , साजन ? ना सखि , दिया ।।11
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ता के बिना नींद ना आवै
करवट करवट रैन गंवावै
सुख पाऊँ जब वो आवै घर ।
का सखि , साजन ? ना सखि बिस्तर ।।12
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उसके बिना चैन नहि पाऊँ
पानी पियूँ न भोजन खाऊँ
चैन पड़े जब दे वो दिखाई ।
का सखि , साजन ? ना सखि , बाई ।।13
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जब आवै दे घर घर फेरा
बिन वा के हर ओर अँधेरा
कबहुँ उजागर कबहूँ मन्दा ।
का सखि , साजन ? ना सखि , चन्दा ।।14
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जब मैं बोलूँ तब ना आवै
काह कहूँ सखि , बड़ा सतावै
सुनै न बात कहूँ मैं जो भी ।
का सखि , साजन ? ना सखि , धोबी ।।15
[9/15/2017, 6:33 PM] Dr. Ranjana Verma: गगरी नीर भरी ढरकावै
बात हिया की सब कहि जावै
बड़ वक्ता बोलै बिनु बैन ।
का सखि , साजन ? ना सखि , नैन ।।16
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गरज गरज अति शोर मचावै
रात रात भर मन डरपावै
गरजै तड़पै जैसे पागल ।
का सखि , साजन ? ना सखि , बादल ।। 17
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वादे सब झूठे कर जावै
बरस बरस फिर मुँह न दिखावै
मधुर वचन कह मन हर लेता ।
का सखि , साजन ? ना सखि , नेता ।।18
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दिल दिमाग से तोड़े नाता
कहें और जो वह ही भाता
फूँके सरबस तोड़े नीड़ ।
का सखि , साजन ? ना सखि , भीड़ ।।19
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कभी हंसावै कभी रुलावै
जब जो जी चाहे दे जावै
हँसी खुशी या दे दे पीर ।
का सखि , साजन ? नहिं तकदीर ।।20
————————डॉ. रंजना वर्मा

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