बपौती ——- मँजु शर्मा

बपौती

                         सुबह नाश्ते के साथ चाय की ट्रे लेकर अनु पति सुमित के पास आ कर बैठ गयी और अखबार पढ़ रहे सुमित से आक्रोशि स्वर में बोली –
” कल पड़ौस वाली गुप्ता भाभी बता रही थी भाई साहब अब भी उन पर हाथ उठा देते हैं ,.. छि इस उम्र में भी भाईसाहब को अपने ऊपर कन्ट्रोल नहीं है, उन्हें शर्म आनी चाहिए  .. बच्चे बड़े हो गए हैं उनके ,.. अब तो उन्हें ऐसी नीच हरकत और बीबी से शर्मनाक व्यवहार करना छोड़ देना चाहिए  … पता नहीं भाभी जी क्यों सहती हैं भाई साहब का ऐसा अपमान जनक व्यवहार , ,, ये मर्द लोग बीवियों को अपने बराबर समझ कर उन्हें मान देना क्यों नहीं जानते ,और ना ही कभी जानना चाहते हैं ,.. किस मामले  में कम हैं औरतें मर्दों से ….. अब तो कानून ने भी औरतों को समान हक़ दे दिए हैं घरेलू हिंसा को गैर जमानती अपराध घोषित कर दिया है ….  “
          ” अरे मोहतरमा आप भी सुबह सुबह क्या बेसुरा राग अलापने बैठ गयी, अरे भई मर्दो को ज्यादा गुस्सा जल्दी आता है ना ,..  तो हाथ उठ ही जाता है , हम तो आप पर हाथ नहीं उठाते ना तो पड़ौसियों के लिए हमारी सुबह क्यों ख़राब कर रही हो। ” सुमित ने मजाकिया लहजे में टोक दिया। मुस्कुराहट से होठों को हल्का सा फैलाते हुए व्यंग भरी दृष्टि डाल खाली बरतनों को उठा कर –
” हुँऊं अगर आप के दूसरी बार उठे हुए हाथ मैंने मजबूती से पकड़ कर झटक नहीं दिए होते तो आज मेरी भी हालत गुप्ता भाभी जैसी होती ” बुदबुदाते हुए अनु रसोई में चली गयी ,फिर आहिस्ता से  बर्तन सिंक में रख कर – ” ठीक है , नहीं करती दिन खराब,मगर भूलो मत गुस्सा किसी की बपौती नहीं है। औरतों को भी बहुत गुस्सा आता है ”  शांति पूर्वक कहा। अनसुना जता  रहे सुमित का सिर अख़बार में फिर से झुक गया।
—  मँजु शर्मा

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook
Twitter
LinkedIn
INSTAGRAM