नव वर्ष —Sushil Sharma

नव वर्ष
कैलेंडर से लटक कर ,गुजर गया यह साल।
कुछ मन की खुशियां मिली ,कुछ का रहा मलाल।

कष्ट कोहरा त्रासदी ,सहता रहा समाज।
जाओ सत्रह आज तुम मिल कर सबसे आज।

स्वागत संग शुभकामना नये वर्ष के नाम।
नये वर्ष में लग रही मीठी मीठी शाम।

नवल वर्ष में हम करें मिलकर ये संकल्प।
रक्षित सब अधिकार हों सुन्दर सुखद प्रकल्प।

वर्ष अठारह की हुई सदी हमारी आज।
यौवन की दहलीज पर आँखों में कुछ राज।

नए वर्ष में रंग भरें आशाओं के संग।
सबको लेकर हम चलें ज्यों पतंग सतरंग।

नये वर्ष से बांधती , हमें प्रेम की डोर।
खुशियां देने आ गयी ,नये वर्ष की भोर।

नये साल की ये किरण मचा रही है शोर।
सूरज प्रेम का उगा है मस्तानी सी भोर।

नूतन वर्ष में हे प्रभु ऐसा करना काम।
अमन चैन हो देश में ,विश्व शांति का धाम।

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