“नव वर्ष कैसा ” — Sukhmangal Singh

“नव वर्ष कैसा ”

मंगल कैसा है नव वर्ष
आये नहीं  सुनहरा हर्ष |
यह कैसा नव वर्ष
जिससे ना लोगों में हर्ष |
वह कैसो  बांधे सेहरा
ठिठुरन सर्द बड़ा गहरा |
आलू-अरहर पर सर्दी पहरा
आंग -आंगन फैला कोहरा |
धुंध कुहासे में किसान दुबका
अलसी सरसों औ खेत ठहरा |
इसा मसीह का जन्म दिवस
आतंकियों से विश्व ककहरा |
धरा पर आतंक घना औ गहरा
मनाओगे ! वर्ष-हर्ष सुनहरा ? ||
 

Sukhmangal Singh

 

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