ऐन वक्त पर बात बिगड़ गई—डा० श्रीमती तारा सिंह

ऐन   वक्त  पर  बात  बिगड़  गई

उस   बेवफ़ा   से  आखें  लड़  गईं

 

देखा  जो , डूबकर  वीराना था वहाँ

पसरा  हुआ, जहाँ  तक  नज़र  गई

 

पहले  प्यार , फ़िर  इनकार ,  बाद

अपने   हर   वादे  से  मुकर  गई

 

कहें   क्या   जो  पूछे  हमसे  कोई

कल  जो  आई , आज  किधर  गई

 

हम सिज़दा करते रहे,उसके कदमों में

वह , सुखी   रहो , दुआ   कर  गई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *