चिरनिंद्रा में लीन हो गया बॉलीवुड एक्टर विनोद खन्ना (निधि गुप्ता)

चिरनिंद्रा में लीन हो गया बॉलीवुड एक्टर विनोद खन्ना

(निधि गुप्ता)

मुंबई (साई)। मशहूर बॉलीवुड ऐक्टर विनोद खन्ना का निधन हो गया है। 70 वर्षीय खन्ना कैंसर से पीड़ित थे। हाल ही में उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वे बेहद कमजोर नजर आ रहे थे। विनोद खन्ना ऐक्टिंग के अलावा राजनीति में भी सक्रिय थे। गुरुदासपुर से सांसद खन्ना ने मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में अंतिम सांस ली।

विनोद खन्ना को बीते 31 मार्च को मुंबई स्थित सर एच.एन.रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अस्पताल की ओर से यही कहा गया था कि खन्ना के शरीर में पानी की कमी हो गयी है। विनोद खन्ना ने दो शादियां कीं। पहली पत्नी गीतांजलि थीं, जिनसे 1985 में तलाक हो गया। बाद में उन्होंने कविता से शादी की। उनके तीन बेटे अक्षय खन्ना, राहुल खन्ना और साक्षी खन्ना हैं। उनकी एक बेटी है, जिसका नाम श्रद्धा खन्ना है।

अभिनय की शुरुआत विनोद खन्ना ने 1968 में फिल्म मन का मीत से की। इसके साथ ही उन्हें मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, इम्तिहान, इन्कार, अमर अकबर एंथनी, लहू के दो रंग, कुर्बानी, दयावान और जुर्म जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के लिये जाना जाता है। वह आखिरी बार 2015 में शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में नजर आये थे।

उनका जन्म 1946 में अविभाजित भारत के पेशावर में हुआ था। विनोद खन्ना अपने वक्त के सबसे हैंडसम अभिनेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत नकारात्मक किरदारों से की। बाद में वह मुख्यधारा के हीरो बन गये। उन्होंने सुनील दत्त की 1968 में आयी फिल्म मन का मीत में विलेन का किरदार निभाया। शुरुआत के दिनों में वह सह अभिनेता या विलेन के रोल में ही नजर आये। ये फिल्में थीं-पूरब और पश्चिम, सच्चा झूठा, आन मिलो सजना, मस्ताना, मेरा गांव मेरा देश, ऐलान आदि।

अमिताभ बच्चन के साथ 1977 में की गयी फिल्म परवरिश ने उन्हें बड़ा ब्रेक दिलाया। पहली बार इसी फिल्म से उन्होंने स्टारडम का स्वाद चखा। विनोद खन्ना को 1971 में पहली सोलो लीड फिल्म हम तुम और वो मिली। बाद में गुलजार के मेरे अपने में शत्रुघ्न सिन्हा के अपोजिट निभाये गये उनके किरदार को आज भी लोग याद करते हैं। गुलजार की ही फिल्म अचानक में मौत की सजा पाये आर्मी अफसर का किरदार निभाने के लिये भी उन्हें काफी तारीफ मिली। बाद में अमिताभ के अपोजिट हेराफेरी, खून पसीना, अमर अकबर एंथनी, मुकद्दर का सिकंदर में भी उन्होंने यादगार रोल निभाया।

कहा जाता है कि अगर विनोद खन्ना ओशो के आश्रम न जाते तो आने वाले वक्त में वह अमिताभ बच्चन के स्टारडम को फीका कर देते। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि विनोद खन्ना की सबसे हिट फिल्मों में से एक कुर्बानी का रोल पहले अमिताभ बच्चन को ही ऑफर किया गया था। उन्होंने यह रोल ठुकरा दिया, जिसके बाद विनोद खन्ना ने यह किरदार निभाया। बाद में विनोद को रॉकी फिल्म ऑफर की गयी, लेकिन उन्होंने यह फिल्म नहीं की। इस फिल्म से संजय दत्त ने बॉलीवुड में एंट्री ली।

 

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