तान्या— Vijay Kumar Sappatti

 

 

आज: दोपहर१ बजे

 

मैंनेसारे बर्तन सिंक में डाले और उन्हेंधोना शुरू किया. आज मन कुछ अच्छा नहीं था. सुबह से ही अनमना सा था. कोई भी काम सही तरह से नहीं हो पारहा था. कभी कुछ छूट जाता था, कभी कुछ नहीं हो रहा था. एक अजीब सी खीझ भी हो रही थी.मन में ये कैसी उदासी थी, मैंकुछसमझ नहीं पारही थी.मुझेडिप्रेशन हो रहा था औरमशीनी अंदाज में, मैं बर्तन धो रही थी.

 

मैंने म्यूजिक सिस्टम पर गाने लगा रखे थे, गाने सुनते हुए काम करना मुझे पसंद था. परआजमुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. कुछ अटका हुआसा था.अचानक म्यूजिक सिस्टम पर अगलागाना शुरू हुआ- जगजीत सिंह का ‘चिट्ठी न कोई सन्देश, जानेवोकौन सा देश, जहाँ तुम चले गए’. बस जैसे इसी गाने के शब्दों के लिए मेरा मन रुका हुआ था, अटका हुआ था. मेरी रुलाई फूट पड़ी. मैं रोने लगी. बर्तनों का धोना बंद हो गया.उधरनल से पानी बह रहा था और इधरमेरी आँखों से भी.

 

तानुकीयाद आ रहीथी.मेरीतानु,मेरी पुपु रानी और सारीदुनिया की तान्या!

 

अचानक पीछे से एकआवाज आई. तान्या की चहकतीआवाज़. “ ममा, क्या तुम भी, कभी भी रोती रहती हो.देखो मैं आ गयी हूँ, चलो चुप हो जाओ, मैं हूँ न !“ मैं एकदम से पलटी. वोमेरेसामने थी.अपनीउसी मिलियन डॉलर वाली मनमोहक मुस्कान के साथ. आँखों में हंसी के साथ. वहीजींस औरटी-शर्टपहने हुए थी, जो मुझे बहुत पसंद थी.

 

मैंने अवाक होकर पुछा,‘तुकब आईतानु?’

 

उसने कहा,‘जब तूमने रोना शुरू किया माँ !’

 

मेरी फिर रुलाई फूट पड़ी,मैंनेउसे गले लगा लिया. बहुत देर तक.उसने कहा‘अरे अब छोडोनमाँ.’

 

मैंने कहा ‘नहीं छोडूंगी, इतनेदिनोंकेबाद आती हो.’

 

उसने कहा,‘अच्छामेरीमाँ, अब जल्दी- जल्दी आया करूंगी.ओकेअब बैठ जाओमाँऔरशांति से बाते करो.कितने दिन हो गए,तुमसेबातेकिये हुए.’

 

मैंने नल बंद किया और उसे अपने कमरे में ले आई और उसके साथ बिस्तर पर बैठ गयी,मेरे बैठते ही वो मेरी गोद में आकर लेट गयी. मैं उसके चेहरे को देखने लगी, कितनी सुन्दर दिख रही थी. वोतो थी ही सुन्दर. आखिर मेरी बेटी थी. मेरी फिर रुलाई फूट पड़ी, मेरी आँखों से आंसू उसके चेहरे पर गिरने लगे.

 

उसने कहा,‘माँ रोना बंद करो न , नहीं तो मैं चली जाऊँगी,देखोमेरा मेकअप ख़राब हो रहा है.’ कह कर वो खिलखिलाकर हंसने लगी. उसकी हंसी सुनकर मैं भी मुस्करा उठी. तान्या की हंसी उसकेव्यक्तित्वकी सबसे बड़ी बात थी. उसकी हंसी में कितनी मुक्तता थी,उसकी हंसी में जीवनधडकता था. वो खुद ही तोजीवन थी.

 

मैंने कहा,‘सुन, मैं तेरे लिए कुछ खाने को ले आती हूँ,’ उसने कहा,‘अरेमाँबैठोना, खाना पीना तो होते हीरहेगा.तुमअपनीसुनाओ.कैसीहो, क्या चल रहा है, कुछनएकपड़े वगैरहखरीदे?शुगरकी दवाई समय पर ले रही हो न ? खाने में ऑईलज्यादा तो नहीं ले रही है न?सलाद ज्यादा खाया करो. स्कूल में ज्यादा देर तकमत रहा करो.’

 

मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और बोली कि ‘थोडा कम बोला कर, कितनाबडबड करती है, शांत रहा कर. अब तुम बड़ी हो गयी हो. थोडा चुलबुलापन कम करो. दादीअम्मामत बन.’

 

वो फिर हंसने लगी,‘माँतुमतो बस. अरेतुमसेसे ही तो सीखा है सब कुछ.औरफिर मैं तुम्हारा खयाल नहीं रखूंगीतो कौन रखेगा, बोल.और सुनाओममा . क्या चल रहा हैआजकल घर में ?’

 

मैंने कहा,‘यहाँ तो बस वैसे ही है. जैसे तुम छोड़ कर गयी थी. सब कुछ रुका हुआ सा.’ मेरीआँखें फिर भीग गयी. तान्या ने मुझे देखा और पुछा, ‘मेरी याद आती हैममा?’

 

मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया, ‘तानु! क्या बोलती हो बेटा,बस घर भर में तेरीयाद ही तो महकती रहतीहै.तुबस जल्दी-जल्दी आया कर. तेरी शरारतें ही यादों को महकाते रहते है.”

 

तान्या फिर हंसने लगी,‘मैंहूँही शरारती, सबसे छोटी जो ठहरी. मैं मस्ती न करूँतो कौन करेगा.’ कह कर फिर हंसने लगी, उसकी हंसी से मुझेबहुत ख़ुशी होती थी. तान्या हंसती थी तो लगता था जैसे फूल बरस रहे हो.

 

मुझे याद आयाउसकेपिछले जन्मदिन पर उसे तेज बुखार था, हम सब उसे हंसाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वो हंस नहीं पा रही थी. फिर उसे हमनेटॉम एंड जेरी की फिल्म दिखाई तो वो हंसने लगी.

 

तानुएक बहुत प्यारी बच्ची थी.उसनेकितनी अच्छी तरह से मैनेजमेंट की पढाई की और बंगलौरकी एक बड़ी कम्पनी में जॉबकरने लगी ,वोवहाँजॉब करने क्या गयी, वही की हो कर रह गयी.

 

मैंने तान्या से पुछा,‘मयंक से मिलने गयी थी?’ तान्या हँसते- हँसते अचानकचुप होगई, उसने कहा,‘नहीं.मैंजब भी उसे देखती हूँ तो तकलीफहोती है .मैं अब हँसते हुए ही रहना चाहती हूँ,अब मुझे रोना नहीं पसंद.’

 

उसकी बात सुनकर मुझे फिर रोना आ गया.तान्याबोली,‘माँ ये बार-बार कारोना बंद करो. मुझे रोना पसंद नहीं है, तुम जानती हो.प्लीज………’

 

मैंने कहा ‘नहीं नहीं बेटा कोई नहीं , बस तुझे मयंकबहुत पसंद था, इसलिए पुछा.खैरअबजाने दे उस बात को .

 

और फिर मैंने हँसते हुए कहा‘बड़ी आई रोना नहीं पसंद बोलने वाली, जब तू बच्ची थी और बार-बार गिर जाती थी, तो दिन भर रोती रहती थी,फिर तो जैसे आदत ही बना ली थी, हर बात पर रोती रहती थी. हर बात पर बस जिद करना और रोना. यहीसीख लिया था. वोतो भला हो तेरी प्राइमरी की टीचर का, जिसने तुझेहँसना सिखाया और फिर जो हंसी तो बस हँसते ही रही.’

 

तान्या फिर से हंसने लगी थी.

 

मैंने कहा,‘पता है जब तू बंगलौर गयी थी ,तबमेरा तेरा कितना झगड़ा होता था कि तू वापस आ जाये.’

 

तान्या ने थोडा मुस्कराकर कहा,‘हां न माँ , मुझे सेल्फमेड बनना था परतुम हो कि मुझे छोड़ना हीनहीं चाहती थी ,हमकितना लड़ते थे पर याद है माँ,रोज ही पैचअप हो जाता था सोने के पहले !’

 

मैंने हंसकर कहा ‘और दो दिन बाद फिर से लड़ाई शुरूहो जाती थी’

 

तान्या खूब हंसने लगी, वो दिल खोल कर हंसती थी. उसकी हंसी में मेरा जीवन था जैसे.

 

मैंने कहा,‘रुक, मैंतेरे लिए कुछखानाबना कर लाती हूँ.’ तान्या ने मेरा हाथ पकड़ लिया,‘माँ, मेरी माँ, मेरे पास बैठो ना, कितने दिन के बाद तो आई हूँ. बाद में खा लूंगी.’‘और फिर तुम मेरे जैसे चॉकलेट ब्राउनीतो बना नहीं सकती होन?. मैं तुमसे बेहतर कुक हूँ ममा!’

 

मैंने कहा,‘सच है , तू तो मेरी अम्मा है लेकिन पिछली बार भी तू बस बाते ही करती रही थी. और बाद में लेट हो रहाहै कह कर चली गयी थी. एक तो तू, बहुत दिनों में आती हो और फिरजल्दी से चली जाती हो. आज तो तुझेकुछखाना ही होगा !’

 

तान्या ने कहा,‘येबताओममा कि स्कूल कैसे चल रहाहै.’

 

मैंनेएक लम्बी सांस ली और कहा,‘स्कूल में मन लगने लगा है,बच्चों की चहल पहल में मन लगा रहता है, पता है, 8th में एक नई लड़की आई है, उसका नाम भी तान्या है, जब मेरे से उसकापरिचय हुआ तो,’

 

तान्या ने मेरी बात बीच में ही काटते हुए कहा,‘जरूरतुमने, उसेअपने पास बिठा लिया होगा.और खूब सारीबाते की होंगी और चॉकलेट भी दिया होगा,’ अब हंसनेकी बारी मेरी थी.वो भी हंसने लगी और कहने लगी,‘क्या मैं तुम्हें जानती नहीं माँ !’

 

मैंने कहा,‘ वो तो सही है बेटा, पर तेरी जगह कोई नहीं ले सकता है तान्या. you are the best !’लेकिनजब उसने उसनेएनुअलडे के फंक्शन में तेरा मनपसंद गाना गाया तो मैं चौंक गयी थी .

 

तान्या बोली, ‘माँ,मैं अभी भी बेस्ट हूँ. न मेरे जैसे कोई थी,न ही कोई और होंगी. और नहीं तो क्या. I am the best for now and forever’

 

मैंने कहा,‘हां रे वो तो है. तेरी जैसी कोई नहीं. चल तू वोगाना सुना.’

 

तान्या ने कहा,‘नहीं माँ आज तो तुम सुनाओ वो बचपन वाला गाना.’

 

मैंने कहा ‘तेरी शरारतें ख़त्म नहीं होती है. है न.’

 

‘चल तू आजा मेरे पास,’ कहकर मैंने उसे अपनेपास घसीट सा लिया और अपनेदिल से लगाकर उसे ये गाना सुनानेलगी, ‘जूही की कली मेरी लाड़ली,नाजों की पली मेरी लाड़लीओ आसकिरन जुग जुग तू जिए,नन्हीसी परी मेरी लाड़ली ,ओ मेरी लाड़ली……’ बस इतना कहते ही, उसने कहा,‘चु…चु. चु …चु….’ कह कर मुझे चूम लिया.

 

मैं फिर रो पड़ी,मैंबहुत देर तक रोते रही. कुछ देर बाद चुप हुई, उसे अपने गले से अलग किया तो देखा कि वो सो गयी थी. मैंने उसे अपने बिस्तर पर सुला दिया. औरउसेएक चादर ओढ़ा कर जल्दी सेकिचन में चलीगयी, और उसके लिए उसकीपसंद का खाना बनाने लगी.

 

उसेहर तरहकाखाना बहुत पसंद था. मैंने बनाना शुरू किया, बहुत प्यार से, बहुत ममता से, आखिर वो मेरी लाड़ की बेटीथी, सबसे प्यारी, सबसे छोटी ! मेरीतानु!

 

मैंने रोटी बनाते हुए याद किया कि किस तरह से उसे मैंने भगवान से मन्नतेंकरके माँगा था. कितने मंदिर गयी थी. मेरी बड़ी बेटी भी मेरे साथ जाती थी. कई जगह माथा टेकने के बाद, प्रभु जी के आशीर्वाद से ये खूबसूरतसी परी मेरे घर आई थी.

 

उसकेनामकरण के लिए घर में बहुतबहस हुई थी ,मुझेउसेएक मॉडर्न नाम देना था और घर के लोग पुराने टाइप का नाम देना चाह रहे थे. आखिर जीत मेरी ही हुई . और मैंने इसे तान्या नाम दिया.औरवोअकसर मुझसेपूछती थी कि,‘माँ तान्या का मतलब क्या है?’

 

मैं उससे कहती थी कि‘ये बाइबिल से जुड़ा हुआ नामहै और इसका मतलब ये है कि तुम सारे परिवार को रिप्रेजेंट करती हो, तुमसे ही परिवार है. तुम ही परिवार हो, तुम में ईश्वर का वास है…’ कहतेकहतेमेरीआँखें भीग जाती थी.

 

उसकेपसंद का खाना बन गया था, मैंने उसे टेबल पर लगाया, फिर याद आया कि तान्या तो बिस्तर पर खाना ज्यादा पसंद करती थी,मैंने खाने को एक प्लेट में परोसा और अपने कमरे में गयी, देखा तो तान्या उठकर बैठ गयी थी और कमरे में मौजूद अपने और मेरे फोटो को देख रही थी. मैंने कहा, ‘बेटा मैंनेखानाबना लिया है,सब कुछ तेरे पसंद का है.’

 

मैंथाली उसके पास लेकर गयी और उससे कहा कि ‘तू बैठ, मैं खिलातीहूँ.कितने दिन हो गए, मैंनेतुझे अपने हाथों से खिलाया नहीं है.’

 

तान्या भी पालथी मारकर बैठ गयी. ये उसका पसंदीदास्टाइल था,वोबिस्तर पर पालथी मारकर बैठ जाती थी, और मैं उसे खिलाती थी, औरफिरउसकेरनिंगकमेंट्री शुरू हो जाती थी,माँ ये-  माँ वो.

 

अभी वो फिर से शुरू हो गयी थी.‘माँ तूम कितना अच्छा खाना बनातीहो. तुम्हारे जैसे खाना पूरीदुनिया में कोई नहीं बना सकता.. मैं तो तरस जाती हूँ माँतुम्हारेहाथ का बना खाना खानेके लिए,’उसकाये बोलना था कि फिर सेमेरी आँखेंभीग गयी.

 

मैंने कहा,‘तेरा जब भीमन हो, आ जाया करना, ये तोतेराहीघर है. सब कुछ तो तेरा ही है.’

 

वो खाते खाते मेरे गोद में झूल गयी,‘मुझे तो कुछ नहीं चाहिए, बस माँ चाहिए. और कुछ नहीं.’

 

मैंने कहा,‘माँकहाँ जा रही है, ममा तो अपनी तानुकी ही है.’

 

खाना हो गया, तो तान्या फिर से मेरीगोद में लेट गयी औरथोड़ी देर मेरी तरफ देखने के बाद , कमरेके चारों और उसकी नज़रें घुमने लगी . उसकीनज़रें अपने पापा के फोटो पर पड़ीं. पूछने लगी,‘माँ, पापा मेरे जैसे दिखते थे न ?’ मैंने हँसते हुए कहा,‘नहीं तू अपने पापा जैसे दिखती है. बड़ी आई पापा, तेरे जैसे दिखने वाले.’ तान्या ने कहीं शून्य में देखते हुए कहा,‘सच है माँ मैंने तो उन्हें ठीक से देखा भी नहीं था. वो चले गएहमसबको छोड़कर.’

 

मैंनेएक गहरी सांस ली और उसके सर को सहलाते हुए कहा, बेटा वोफौजी थे, देश पर कुर्बान हुए है, शहीद हुए है, और मुझे नाज़ है उन पर, औरतुम्हें भी उन पर फख्र होना चाहिए.’

 

तान्याखड़ी हो गयी और एक जोरदार सेल्यूट अपने पापा की तस्वीर को देखते हुए दिया. मुझे हंसी आ गयी,तानुकी शरारतें गयी नहीं थी. और उसकी यही छोटी-छोटी बाते मुझे बहुत पसंद थी.

 

मैंने कहा,‘बेटा तू जल्दी-जल्दी आया कर, मुझे तेरी बड़ी याद आती है, मुझे तेरी बड़ी जरूरतमहसूस होती है.’ तान्या ने हँसते हुए कहा,‘अरे माँ तूम तो सोयी रहती हो, मैं तो आती हूँ न तुम्हारेसपने में. आकरदेख कर जाती हूँ किसब ठीक है. अगरतुम्हारीतबीयतखराब रहती है तो मैं जादू कर देती हूँ और तूम ठीक हो जाती हो. सच्ची में!

 

मैंने हँसते हुए पुछा,‘अच्छा बता तो कैसे जादू करती है,’ वो खड़ी हो गयी और जादूगरों की तरह एक्टिंग करने लगी और मुझे छुमंतर बोल दी. मैं जोर से हँसनेलगी.

 

तानुबस ऐसे ही थी. जीवन से भरी हुई, हंसी से भरी हुई, हर जगह बस वो ही होती थी, मेरी प्यारी तानु.मेरी बच्ची.मेरी जान !

 

तान्या ने घर भर का एक चक्कर लगाया और मेरे पास आकर कहने लगी,बहुतसारे पौधे लगा लिए है ममा, और ये दो नई बिल्लियाँ भी पाल ली है.

 

फिरउसने मेरी तरफ गहरी नज़र से देखा औरकहा , औरबताओमाँ ,मैंकैसे-कैसे और कब-कबयाद आई तुम्हें.

 

मैंने  कुछ देर सोचा और कहा ‘कुछ अजीब सी बाते तो होती रहतीहै ,जबमैं अमेरिका गयी थी वहां एक स्टोर में की-चेन लेने के लिए बक्से में हाथ डाला तो सिर्फ तेरे नाम का की-चेन मेरे हाथ में आया. वहीअमेरिकामें एक होटलमें खाना के लिए हम सब गए थे किजैसे ही हम भीतर गए , तेरा मनपसंद गाना बजने लगा था .पिछले बरस देहरादून के एयरपोर्ट पर तेरी बहुत याद आई तो देखा कि एक पसेंजर बस वहां अचानक आई जिसके पीछे के साइडपर तानुलिखा था और जब भी मुझेतेरी बहुत याद आईतो तेरी बड़ी बहन या तेरी कोई न कोई सहेली मुझे जरूर फ़ोन करती है. ऐसे ही बहुत सी बातेहै……..’

 

ये सब कहते-कहते मेरी आँखें भीग गयी थी .

 

तान्याचुप हो गयी अचानक , मेरी तरफ बहुत देर तक देखतीरहीऔर फिर बहुत उदास हो गयी.फिर भरी हुई आँखों से कहने लगी,‘माँ मुझे तुम्हारीबहुत याद आती है, सच में तुम्हारेसिवा कोई नहीं हैमेरा माँ.’

 

ये सुनकर मेरी रुलाई फूट पड़ी. मैंने उसे गले से लगा लिया. वो बहुत देर तक सुबकती रही.

 

फिर वो शांत हुई, उसने कहा,‘माँवोदिनयादहै……!’

 

मैंनेउसेदेखाऔरमेरीआँखोंकेआगेअँधेराछागया!

 

कई साल पहले /  रात 9:३० बजे

 

तानुका फ़ोन आया,उस वक्त मैं खाना खा रही थी, मैंने मोबाइल उठा कर पुछा,‘हां बेटा?’तानुने कहा,‘माँ मैं मयंक के साथ डिनर पर जा रही हूँ. आज मैं बहुत खुशहूँमाँ, तुम खुश हो नमाँ?” मैं तो खुश थी ही,तानुकी हर ख़ुशी में मेरी ख़ुशी थी. मैंने हां कहा और कहा कि अपना ख्याल रखना बेटा, उसनेहां कहा और फ़ोन कट गया. मुझे अचानक सेथोड़ी बैचेनीहोने लगी थी.उस रात मुझे ठीक से नींद भीनहीं आई.

 

 

उसीरात / रात १ बजे

 

मोबाइल पर लगातार बजती हुई घंटी ने मेरी कच्ची पक्की नींद को झकझोरा. मैंने देखा, मोबाइल के स्क्रीन में कोई अनजाना सा नंबर था.मैंनेफ़ोन उठाया. उधर से एक अनजानी आवाज आई,‘क्या आप तान्या की माँ बोल रही है ?’ मेरे चेहरे पर पसीना आ गया, इतनी रात के फ़ोन का अंदेशा कुछ अच्छा नहीं था. मैंनेजल्दीसे कहा,‘हां, क्या हुआ, सब ठीक तो है,तानुठीक तो है ?’ उस आवाज़ ने थोडा रुककर कहा,‘माफ़ कीजिये, मयंक और तान्या का एक्सीडेंट हो गया है,’ मैंने चिल्लाते हुए पुछा,‘तानुकैसीहै, उसने हिचकिचाते हुए कहा,‘माफ़ कीजिये आंटी; वो ठीक नहीं है, मयंक को कम चोट लगी है, लेकिनतान्या को सर में गहरीचोट लगी है. हम उसे मनिपालहॉस्पिटल ले जा रहे है, क्या आपका बंगलौर में कोई रिश्तेदार या दोस्त है ?जिससे हम संपर्क कर सके?’

 

इतना सुनना था कि मेरा दिमाग और दिल नेकाम करना बंद कर दिया था. मैं सुन्न हो गयी थी.

 

दूसरे दिन / सुबह ६ बजे

 

दूसरे दिन सुबह तान्या 6 बजे इस संसार को छोड़कर इन्द्रधनुषके उस पार अपने प्रभु से मिलने चली गयी.

 

मुझेहमेशा के लिए अकेला छोड़कर.

 

मेरीतानु, मेरी बेटी,मेरी तान्या !

 

आज/ शाम ५ बजे

 

मैं फिर रोने लगी. धुंधली आँखों से देखा तो तानुमेरे पास ही खड़ी थी, उसने मेरे सर पर हाथ फेरा और मेरे गले लगी और धीरे- धीरे घर से बाहर चली गयी.

 

म्यूजिक प्लेयर परउसका मनपसंद गाना बजा रहा था “ knock knock ,knocking on heaven’s door’ये गाना उसे बहुत पसंद था और उसके अंतिम यात्रा पर भी यही गीत बजाया गया था;  यही उसकी आखिरी इच्छा थी!

 

मैं बहुत देर तक पलंग पर बैठकर/ लेटकररोती रही.

 

 

आज/ रात 9 बजे

 

मैं चुपचाप खाना खा रही थी किअचानकबड़ी बेटी अंजलि का कॉल आया अमेरिका से. उसने कहा कि माँतुम्हें पता है? आजमेरेसपने में तानुआई थी,वो हमारा ख्याल रखती है.वो तो हमारे साथ ही है हमेशा!’

 

मैंनेशांतस्वर में कहा, हां मुझे पता है, सबकुछ पता है, वो यही है. हमारे साथ!

 

हमारीतानु, हमारी तान्या.

 

 

 

 

 

 

एक छोटी सी कोशिश : विजय

विजय कुमार

 

Email : vksappatti@gmail.com       

Mobile : +91 9849746500

 

VIJAY KUMAR SAPPATTI

FLAT NO.402, FIFTH FLOOR,

PRAMILA RESIDENCY; HOUSE NO. 36-110/402,

DEFENCE COLONY, SAINIKPURI POST,

SECUNDERABAD- 500094 [TELANGANA ]  

 

all photos courtesy google images

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