रमे रामे मनोरमे—सुशील शर्मा

*रमे रामे मनोरमे*
सुशील शर्मा
विनम्रता
संस्कार
समर्पण
स्नेह
समाधि
के अविरल स्त्रोत राम हैं
त्याग
तपश्चर्य
संस्कृति
संस्कारों
के संवाहक राम हैं
कौशल
बुद्धि
विवेक
साधना
के धारक राम हैं
न्याय
सुशासन
नियम
यम
के पालक राम हैं
वीरता
रणधीरता
काल
महाकाल
की प्रतिमूर्ति राम हैं
राम का ऐश्वर्य
राम का चरित्र
राम के गुण
राम का राज्य
राम सा त्याग
राम सी वीरता
राम सा व्यक्तित्व
सोया है हमारे अंदर
कोई उसे नही जगाना चाहता
क्योंकि इसके लिए
बहुत कुछ खोना पड़ता है
सब कुछ त्याग कर ही
राम सा ऊंचा उठा जा सकता है
अविरल राम हर हृदय
में बहता गुण है।
जो आज की मनुष्यता की
बौनी पहुंच से परे है।
राम बनना बहुत कठिन है
भरत बनना असंभव है
लक्ष्मण की सेवा
कौसिल्या का वात्सल्य
सीता सा समर्पण
हनुमान सी भक्ति
उर्मिला सा विरह
मनुष्यता की श्रेष्ठतम संवेदनाएं हैं
दशरथ सा मोह
कैकई सी कठोरता
रावण सा अहंकार
मंथरा सी दुर्बुद्धि
मनुष्यता की निम्नतम विचारणायें हैं
रामायण का यह सार है
राम के गुणों को अपनाना ही
राम राज्य का विस्तार है।
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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