परमात्मा-पिता — विशिखा अमोल इंगेवर

परमात्मा-पिता

पिता के कई रूप,कई नाम,पर पिता एक ही जन्म देनी वाली  माँ हमारी आत्मा है,तो पिताजी परमात्मा,पिता के अलग अलग स्वरूप को निस्वार्थ  स्वाभाव को कैसे पहचाने,धरती में जन्म लेने वाला हर एक व्यक्ति परमात्मा (पिता) के नाम को अलग अलग नाम से जानते  है,कही पापा,डैडी,बाबा नाम एक ही परन्तु कार्य अनेक। जैसे-

 जग जाने जिससे वो पहचान है पिता,
 बिन बोलो सब समह्ज जाते वो है पिता ,
 हर फर्ज चूकाते और निभाते वो है पिता,
 बिना दिखाए प्यार करे वो है पिता ,
 आँसू  पोछकर मुस्कान दे जाये वो है पिता,
 कभी ख़ुशी  तो कभी अनुशासन वो  है पिता,
 जिम्मेदारियों से ना मुँह मोडे वो है पिता,
 सपने अपने और रास्ता दिखाए वो है पिता,
 होते है तोड़े से सख्त पर देते है हमको वक़्त वो है पिता
,जीवन में जिना सिखाये वो है पिता,
 कभी अभिमान,तो कभी स्वाभिमान वो है पिता,
 बच्चो के संग बने बच्चे वो है पित
                             पिता  की शक्ति का हम अनुमान नहीं लगा सकते है और  ना ही बयान कर सकते है,उसको जो शक्ति प्रदान हुई, है उसका एह्सास सिर्फ एक पिता को ही हो सकता है,हर वयक्ति को नहीं।हमारे जीवन में  पिता एक सुरक्षा कवच है,कठिनाईयो से निकल कर अपने चेहरे पर शिकन न आने दे वो ही पिता है,और ऐसा कार्य एक ईश्वर ही कर सकता है.हर वयक्ति अपने पिता से ही प्रेयणा लेता है,हमे उनकी सिख से आगे की और बढ़ता है,और हर औलाद को ऐसे कर्म करना चाहिए जिससे उनके पिता का नाम हो,और हर पिता के नाम में ईश्वर,परमात्मा हो.

 

                                                                                    विशिखा अमोल इंगेवर
                                                                                    (vishikha amol ingewar)
                                                                                    शिव शेर्यस,सेक्टर-५०
                                                                                    सीवुड्स,नेरुल ४००७०६

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