जस्टिस खेहर ने ली चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पद की शपथ (रश्मि कुलश्रेष्‍ठ)

जस्टिस खेहर ने ली चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पद की शपथ

(रश्मि कुलश्रेष्‍ठ)

नई दिल्ली (साई)। जस्टिस जेएस खेहर बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन गए। राष्ट्रपति भवन में उन्होंने प्रणव मुखर्जी की मौजूदगी में पद की शपथ ली। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

एक सख्त जज के तौर पर जाने जाने वाले देश के पहले सिख चीफ जस्टिस खेहर करीब 7 महीने तक इस पद पर रहेंगे। वह देश के 44वें चीफ जस्टिस हैं। खेहर उस समय देश के चीफ जस्टिस बन रहे हैं जब कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर टकराव चल रहा है।

कलीजियम व्यवस्था को लेकर अहम फैसला सुनाने वाले खेहर की न्यायपालिका की सर्वोच्चता के बारे में राय बिल्कुल स्पष्ट है। खेहर कीअध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने ही सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) कानून को खारिज कर दिया था। केन्द्र सरकार ने अगस्त, 2014 में NJAC एक्ट बनाया था। यह एक्ट संविधान में संशोधन करके बनाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि NJAC बनाने वाले कानून से संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन होता है और 5 जजों की संविधान पीठ ने इसे खारिज कर दिया था। पीठ में जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोजेफ और जस्टिस ए. के. गोयल शामिल थे।

कोर्ट का वक्त बर्बाद करने वालों पर सख्त

13 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट के जज बनने वाले खेहर सख्त कानूनी प्रशासक माने जाते हैं। खेहर बार-बार सुनवाई को स्थगित करने की अपील कर कोर्ट का समय खराब करने वाले लोगों के प्रति बहुत कठोर हैं। सुप्रीम कोर्ट में किसी केस के मामले में पूरी तैयारी नहीं करके आने वाले वकीलों के प्रति भी खेहर नरमी से पेश नहीं आते। एक बार तो खेहर कोर्ट रूम से इसलिए बाहर चले गए थे क्योंकि वकीलों ने अपने कागजात सही तरीके से पेश नहीं किए थे। दरअसल, खेहर बार को यह संदेश देना चाहते थे कि वकीलों को अपना पूरा होमवर्क करके ही कोर्ट में आना चाहिए था।

सहारा चीफ को भिजवा चुके हैं जेल

जस्टिस खेहर और जस्टिस के एस राधाकृष्णन की बेंच ने सहारा के चेयरमैन सुब्रत रॉय सहारा को निवेशकों के पैसे नहीं लौटाने के कारण तिहाड़ जेल भेज दिया था। बाद में कुछ वरिष्ठ वकीलों ने आरोप लगाया कि रॉय के मामले की सही सुनवाई नहीं हुई और उनके साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों के बावजूद खेहर ने इस मामले की दोबारा सुनवाई से इनकार कर दिया। बाद में एक नई बेंच के जिम्मे इस मामले को सौंपा गया। बावजूद इसके रॉय को दो साल से ज्यादा समय तक जेल में बिताने पड़े और उन्हें तभी परोल मिली जब उनकी मां का निधन हुआ।

अंसल बंधुओं पर हुए थे नाराज

हाल ही में उपहार कांड में अंसल बंधुओं को खेहर का गुस्से का शिकार होना पड़ा था। खेहर ने अंसल बंधुओं के वकील से अपने मुवक्किल की तरफ से हलफनामा मांगा जिसमें उनके देश छोड़कर नहीं भागने की बात हो। अंसल बंधुओं ने तुरंत ही इसपर हामी भरी थी।

 

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