प्रकृति, इतनी निर्मम हो सकती है–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

कहते हैं, प्रकृति और ईश्वर कहने को अलग-अलग हैं इनमें कोई भेद नहीं है दोनों एक दूजे के पर्याय हैं इनमें कोई क्लेश नहीं है प्रकृति परिवर्तन के नर्तन में,नित गल-गलकर ईश्वर की कांति- सिंधु में ,मिल – जुलकर स्वर्गलोक Read More …