ऐ ग़म ! तुझे मैं देख ले फिर से मसल कर आ गया — दीपक शर्मा

 दीपक शर्मा   ऐ  ग़म ! तुझे  मैं देख ले फिर से मसल कर आ गया मेरे साथ था बस हौसला तम से निकल कर आ गया। गर  हक़  की  राह चलनी है तो आजा मेरे साथ चल सच सदा Read More …

इस उजड़े गुलशन को जिसने आबाद किया था–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  इस  उजड़े  गुलशन को जिसने आबाद किया था कहते   हैं   लोग,  उसी   ने  बर्बाद  किया है   गरेबां  की  आग  जब  बुझी, दामन  में लगाया काम जो दुश्मन न किया, दोस्त जल्लाद किया है   जमाने की दरिया में Read More …

आपको मेरे दिल की क्या खबर–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

    आपको    मेरे   दिल   की   क्या   खबर आप    तो   अनजाने   रहे    रात   भर   धुआँ-धुआँ  दीखता  आपको  गुम्बदे – मीना1 मेरा  दिले-दाग  आपको  आता  नहीं  नजर   कैसे  सुनाऊँ  दिले – हाल  अपना,  आपको जब  भी  लगती  सुनाने, रात Read More …

आपका दिल मेरे प्यार के काबिल नहीं है–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  आपका  दिल  मेरे प्यार के काबिल नहीं है खाक  में   मिल  जाना  साहिल  नहीं  है   न   देखिये  आप  नफ़रत  की  निगाह से मेरा  दिल  बिस्मिल1 है , कातिल  नहीं  है   शमां चुप है,आशिक परेशान है,आलमे-तस्वीर2 कहती   है Read More …

आ जा कि तेरा आज भी इंतजार है–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  आ  जा   कि  तेरा  आज  भी  इंतजार है तेरे   बिन   दुनिया  में  जीना  दुशवार  है   तेरी  नजरों  से  हम  दूर  सही ,मगर  मेरा दिल  आज  भी  तेरी  जुल्फ़ों में गिरफ़्तार है   जाने  क्या  सकून  मिलता ,तेरी  गली Read More …

कुछ बदला है ?—-विश्वनाथ शिरढोणकर

Vishwanath Shirdhonkar September 23, 2015 · कुछ बदला है ? ———————— अब आजकल कुछ मौसम बदला है अभी अभी कुछ मिजाज भी बदला है !! इतनी जल्दी दिल खोलकर मत रख कल ये बदला आज वो भी बदला है !!! Read More …

राष्ट्रकविःरामधारी सिंह दिनकर —-लाल बिहारी लाल

जन्मतिथि23 सितम्बरपर विशेष राष्ट्रकविःरामधारी सिंह दिनकर *लाल बिहारी लाल जन्मः 23 सितम्बर 1908 देहान्तः 24 अप्रैल 1974 आधुनिक हिंदी काव्यजगतमें राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना का शंखनाद करने वाले तथा युग चारण नाम से विख्यातवीर रस के कवि रुप में स्थापित हैं।दिनकर Read More …

रोज कुआं खोदते रोज पानी पीते दिहाड़ी मजदूर– डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

रोज कुआं खोदते रोज पानी पीते दिहाड़ी मजदूर । प्रात : काल जब ग्राम वासी जागअपनी दिनचर्या पूरी करते हैं , तब उनमें से कुछ ग्रामीण गाँव छोड़ कर शहर की तरफ पलायन करते दिखते हैं । बड़े –बड़े शहरों Read More …

हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्‍वीकार करें—अलकनंदा सिंह

हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्‍वीकार करें durga-puja-sindur-khela-painting-by-ananta-mandal अतिवाद कोई भी हो, वह सदैव संबंधित विषय की उत्‍सुकता को नष्‍ट कर देता है। अति  की घृणा, प्रमाद, सुंदरता, वैमनस्‍य, भोजन, भूख, जिस तरह जीवन को Read More …

जनप्रतिनिधियों के शपथ पत्र में दिखाई गई मात्र संपत्ति ही की जांच क्यों मीलार्ड? – मौलिक भारत

सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लिया मौलिक भारत का ई मेल MAULIK BHARAT <maulikbharat@gmail.com> Fri, Sep 22, 2017 at 3:20 PM To: MAULIK BHARAT <maulikbharat@gmail.com> Bcc: swargvibha@gmail.com PRESS RELEASE  :  सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लिया मौलिक भारत का ई मेल जनप्रतिनिधियों Read More …