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 स्वतंत्रता दिवस

 

स्वाधीनता का अर्थ है,स्व की अधीनता //परमार्थ प्राप्त कराना न कि दीनता/
शहिद अब तो हों गए गुमनाम हम वतन्,, अब जश्न कि चिंता है श्रद्धांजलि कि कम्/
जिस अंगेजियत के लिये बलिदन कर दिया,,उसि ने दिलो-दिमग पर अधिकार कर लिया ..
संस्कृति अब हों गयी निर्वश्त्र साथियों,.हिंदि है अब दम तोड़ती घुटन कतिलो !!!
1947 में जब स्वाधीनता मिला,..कुछ वक्त हि ये स्वाधीनता रहा ..
चंद कदम बद आजादी बन गया ,.अब 15 aug. जस्न्-ए-बर्बादी बन गया ..
मंद पवन को आँधी ना कहो ,.स्वधिनता को जस्ने आजदि ना कहो./
भाव को समझो वरना अनर्थ हि होगा ,.स्वधिनता दिवस मनना ब्यर्थ हि होगा /.
बेशक तुम अंग्रेजी,चाइनीज ,फारसी पढो , ,ज्ञान को बढ़ाओ न उसको सीमित करो ./
पर अपनि सभ्यता ,संस्कृति का गला मत घोटो ,. प्राणहीन हों रही हिन्दी
प्रिये! इसका कत्ल रोको .
लो प्रण आज स्वयम को अपने अधिन कर लो,. मन ,क्रम्,वचन पर जीत कर लो ./
अधिकार न छिनो किसी का गला मत घोटो.., जिने दो सबको मनुज्! प्राण वायु न रोको ./
रोग ,गरीबी ,भ्रष्टाचार को रोको., बच्चो,औरतो पर हों रहे अत्याचार को रोको/.
विश्वास,मनुजता ,विकास ,एकता कि बात को सोचो ,.मजदूर, किसान मर रहे है
एनके आशु तो पोछो ./
अकेले जश्न-ए-आजादी मना रहे हों पहलवान!,, ये जन्मदिन नही तुम्हारा है
देश का त्योहार ./
तुम्हे क्या कमी है तुम तो ता उम्र हों आज़ाद ,..पर इस दिन तो कर दो किसी
के लिये दो अश्रु का बलिदान ./////////
…………………………………………………..ई. ज्योति प्रकाश सिंह

 

 

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