tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






सत्ता से चिपके रहने का मन्त्र अशेष

 

 

गांधी आज तुम्हारा जन्मदिवस है,
कार्यालयों में साल भर से धूल फांकती
तुम्हारी मूर्ति आज साफ़ की जायेगी,
अधिकारियों के लम्बे भाषणों से पूर्व
तुम्हारी मूर्ति पर माला चढ़ाई जायेगी.
विद्यालयों मे प्रभातफेरी निकाली जायेगी
तुम्हारे आदर्शों की स्तुति गाई जायेगी.


पर यह देखकर तुम हमारी मान्यताओं,
आस्थाओं के विषय मे भ्रमित न हो जाना,
यह सब तो इसलिये है क्योंकि आज के
दिन के लिये शासन का ऐसा आदेश है.


तुम्हारी म्रत्यु पर आइंस्टाइन ने कहा था
आगे की पीढ़ियां शायद ही विश्वास करेंगी
कि हाड़ मांस वाला कोई ऐसा व्यक्ति
इस धरती पर कभी सचमुच चला था.
सो हम कहां विश्वास करते हैं तुम पर?
कहां आस्था है हमें तुम्हारे सिद्धांतों पर?


पर आज हम मशीन से बुनी खादी का
टिनोपाल से लकलकाता सूट पहिनकर,
तुम्हारा गुणगान करेंगे दोनों हाथ जोड़कर
क्योंकि भ्रमित करने का तू अस्त्र विशेष है.


तुमने सामाजिक समरसता का बीड़ा उठाया था
जिन दलितों को ’हरिजन’ कह गले लगाया था,
उनमें कुछ तुम्हें षड़यंत्रकारी जातिवादी कहते हैं
तुम्हारे आदर्शों को नाटक बताते और नकारते हैं.
तुमने भाईचारे की स्थापना हेतु प्राणों की आहुति दी,
आज हम जिहाद करते हैं, प्राणों की आहुति लेते हैं.


आज हम ’मन में राम, बगल में छूरी’ रखकर
और झूठ से प्रेम व सत्य से दूरी रखकर,
तुम्हारा गुणगान करेंगे, जनता को बहलायेंगे,
क्योंकि सत्ता से चिपके रहने का तू मंत्र अशेष है.

 

 

 

महेश चंद्र द्विवेदी

 

 

HTML Comment Box is loading comments...