tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






इन्द्र्धनुष के रंगों जैसा, मुझको रंग दो

 

 

इन्द्र्धनुष के रंगों जैसा, मुझको रंग दो,

होली के रंगों को, सतरंगी कर दो।

 

राग-द्वेष, बैर-भाव, नफ़रत जड़ से मिटाकर,

बासंती अवसर को, खुशियों से भर दो।

 

हिन्दू-मुस्लिम की बात नहीं करता यारों,

मानवता जन-जन के जीवन में भर दो।

 

भूख-गरीबी, आतंकवाद की,आज जलाकर होली,

शिक्षा के रंगों से, जीवन रोशन कर दो।

 

धर्म-जाति और क्षेत्रवाद की, खेल रहे जो होली,

उन देश के गद्दारों को, होली में स्वाहा कर दो।

 




डॉ अ कीर्तिवर्धन

 

 

HTML Comment Box is loading comments...