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गांधी फिर कब आओगे ?

 

 

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव

 

 


मोहनदास कमरचंद जी की,
देश प्रेम की आंधी थी।
पीछे देश खड़ा मर मिटने,
एसी हस्ती गांधी थी।
इसीलिये तैयार हुये,
नेहरू जाने को जेलो में।
मालूम था सिर दे देंगे
पीछे सब खेलों खेलों में।
मालूम था कि थे पटेल,
मौलाना किदवई जान लिये।
वल्लभ भाई के पीछे,
मिटने कितने अरमान लिये।
लिये जेब में घूम रहे,
फांसी की रस्सी भगत सिंह।
कितने मिटने को आतुर थे
बिस्मिल राजा, रणजीते सिंह।
सावरकर बन कर के मशाल
थे अंधकार में चमक रहे।
इतिहासो के पन्नों में
आजाद, गोखले दमक रहे।
कितने थे गफ्फार और,
कितने सुभाष की आंधी थी।
भूल समझाने में होगी
आजादी केवल गांधी थी।
कितनी लक्ष्मीबाई कितने
भीमराव से गांधी थे।
कितने मंगल पांडे शेखर
ब्रिटिश राज्य में आंधी थे।
मरने और मारने का
जज्बा था हक को पाने का।
सीने में थी देश भक्ति
होंठों पर उसको गाने का।
घर घर में थे रमन यहाँ
और घर घर में टैगोर यहाँ।
हर घर में थे बोस हरेक घर
आजादी का शोर यहाँ।
दर्शन का भंडार देश,
और थे शहीद भी गली गली।
राजा मोहन राय हरेक घर,
हरिशचन्द्र भी गली गली।
कई विवेकानन्द यहाँ थे
दर्शन और विज्ञान भरे।
कटने को आतुर शीशे में
न्याय और विज्ञान भरे।
थे कुरान ओर गीता पर शिर
साथ-साथ कटने वाले।
गुरूवाणी और बाइबिलो पर
एक साथ मरने वाले
कितने ही मर गये लिये
सपना अपनी आजादी का।
जला दिये कपड़े विदेश के
बाना पहना खादी का।
अंग्रेजो के खड़े सामने
हाथ नमक और नील लिये।
जंगल में स्वागत करने को
खड़े धनुष थे भील लिये।
पर गोपाला चारी को
माउन्टबेटन ने क्या सोंपा ?
भ्रष्ट प्रशासन जातिवाद का
छुरा पीठ पर एक घोंपा।
गांधी का वादा था शासन
अंतिम जन तक जायेगा
क्या मतलब था दमन प्रशासन
का उन तक ले जायेगा।
देश खींच ले आये नेता
रिश्वत के चैराहे पर।
स्वच्छ वोट की नदी पटक दी
देखा गन्दे नाले पर।
राष्ट्रपिता झूठे कर डाले
देश के इन नेताओ ने।
लिया खजाना लूट मंत्रियों
ने और नौकर शाहों ने।
डरते हैं इमानदार,
इस प्रजातंत्र में गांधी जी।
उन पर बेईमान करते हैं।
क्रूर प्रशासन गांधी जी।
चील भेडि़ये बेहद खुश,
लाशों की उनको कमी नहीं।
गेहँू दाल गगन पर हैं
दिल्ली के दिल में नमी नहीं।
वे रेशम खादी किधर गये।
हो गई कहां मलमल गायब ?
छोड़ गये खेतों को बच्चे
बन कर के छोटे साहब।
सतियों के जलने के बदले
जलती बहुयें सधवायें।
देश जलाते मंत्री नेता
बैठें है सब मंुह बायें।
हर दिन ट्रेनों की दुर्घटना
हर दिन हत्या बलात्कार।
हर दिन लूटमार और चोरी
हर कोने में चीत्कार।
हिन्दी कम्प्यूटर में गुम गई
गाली ही साहित्य बनी।
भाषाओं से प्रान्त बट गये
है आपस में तना तनी
किसकी रक्षा करते सैनिक
सीमा पर शहीद होकर।
वे जो देश बेचते हैं या
जो पग पग खाते ठोकर।
सच के अब प्रयोग बापू जी
बतलाओं क्या कर लेंगे।
सचमुच के सत्याग्रह पर तो
दुष्ट जान ही ले लेंगें।
किस किस मुद्दे पर सत्याग्रह
बतलाओं बापू करलों।
कई छेद है इस चादर में
किस किस को बापू ढकलें।
लगता है डर गये आप भी
अब भारत में आने से।
कैसा देश मिला हम सब को
आजादी के आने से।
आजादी के किस्से बापू
हुये किताबों से गायब
लोकसभा के भ्रष्ट प्रतिनिधि
नग है देश भक्त नायब।
कुछ तो लूट रहें हैं दुश्मन,
कुछ ये नेता गांधी जी।
दिया प्रशासन ने मौका
जनता को बिकने गांधी जी।
अंधकार में कोई किरण
न तुम हो न इतिहास बचा।
यहाँ बचे हर जगह लुटेरे,
नहीं हास परिहास बचा
धीरे धीरे मरती जनता
धीरे धीरे देश यहाँ।
इन हालातों में क्या गांधी
बच पायेगा देश यहाँ।

 

 

 


डॉ.कौशल किशोर श्रीवास्तव

 

 

 

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