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ईद पर कुछ दोहे

 

 

eid

 

 

बादल का पर्दा हटा,दिया चाँद ने दीद।
आओ हम मिलकर गले,कहें मुबारक ईद॥

 

नए-नए कपड़े पहन,निकलेँ कल्लू खान।
देखो दुगुनी हो गई,निज टोले की शान॥

 

जगह-जगह मेलेँ लगें,कितनी सजीँ दुकान।
बच्चे लेकर साथ में,देखें चाचा ज़ान॥

 

हर घर में पकने लगें,भिन्न-भिन्न पकवान।
छोटों को ईदी मिली,सबके मुख मुस्कान॥

 

ईदी देकर ईद की,जाता है रमजान।
कहता नफरत भूलकर,प्रेम करो इंसान॥

 

'पूतू' समझो ईद का,प्यारा सा पैग़ाम।
मिल सबसे लगकर गले,जो भी खासो-आम॥

 

 

 

पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

 

 

 

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