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विजय दिवस दशहरा पर विशेषः-
तीन हाइकु
शशांक मिश्र भारती


एक-
मन का जले
अगर रावण तो
हो दशहरा।


दो-
पुतले जले
हैं हंसते रावण
घर हमारे।


तीन-
गुण वृद्धि
हम कर सकें तो
विजय पर्व।

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