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होली गीत

 

holi

 

 

फूलों से अरमां लेकर,
बरसे सावन घनघोर सी,
मन को रंगले रमते जोगी,
होली है चित्तचोर की ।

 

तिमिर द्वेष की गोदी में,
श्रद्धा शोभित प्रहलाद की,
उर उमंग जब जलती होली,
होती प्रीत रंग बौछार की ।


बैरी बैठा मन के भीतर,
खींचे ताने एक डोर सी,
बाहर निकले मैं खेलूं होली,
कर बरज़ोरी अब ज़ोर की ।

 

आशाओं की छोड़ चुनरिया,
गौरी नाचे मनमोर सी,
आज खुले हैं सारे बंधन,
गैय्या चरती रण-छोड़ की ।

 

सैंया अबके रंगना ऐसा,
छोरी तरसे रंगरेज़ की,
फगवा खेले मन के अंगना,
चितवन नंदकिशोर की ।

 

होली की रंग बिरंगी शुभ कामनाओं सहित,

 

 

' रवीन्द्र '

 

 

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