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हे शिव, हे शंकर

 

 

महेश रौतेला

 

 

 

shivratri

 

हे शिव, हे शंकर,
तुम्हारे लौटने तक
बहुत कुछ बदल जायेगा,
गंगा चलते-चलते
मैली हो जायेगी,
कच्चे रास्ते पक्के हो जाएंगे,
सच्चे हृदय सो जाएंगे,
भारत का दायित्व
तुम्हारे कन्धों पर डाल
सबका मन विदेशी हो जायेगा,
तुम्हारे गले के साँप,
इधर-उधर भटक,
विष वमन कर जाएंगे ।
हे शिव, हे शंकर,
तुम्हारे लौटने तक
बहुत कुछ बदल जायेगा ।

 

 

 

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