tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






 

 

इरादा-ए -ईद

 

eid

 

पाला पोसा अरमानों से सजाया,
आज उसकी क़ुर्बानी का दिन,
ज़िल हिज़ की दसवीं को आज,
सवाबों की इन्तेज़ामी का दिन ।

 

मैं मैं करता रहा वो लुकछिप,
उसी की आज हलाली का दिन,
कुबूल हो ये निशानी खुदा को,
मुकम्मल इंसानियत का दिन ।

 

बड़ा दुलारा है प्यारा ये अपना ,
आज इस से रुखसत का दिन,
तकसीम हुआ कईं हिस्सों में,
हुआ नसीबन नज़राने का दिन।

 

मरता नहीं अज अमर ये अदना,
'मैं' को ही अज समझने का दिन,
गड़ा देनी हैं होकर बे- रहम नज़रें,
आज नज़र की तेज छुरी का दिन।

 

हो ना गुमराह समझ सही आज,
है खुदा से वादा निभाने का दिन,
' मैं ' के अपने प्यारे से अज को,
ज़िबह करने के नेक इरादे का दिन ।

 

 

Good Wishes on Eid-ul-ajha.

 


' रवीन्द्र '

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...