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एक दीप

 

 

एक दीप तुम जलाओ ,
एक दीप मैं जलाऊँ
एक दीप प्रीत का
एक दीप ज्ञान का
एक दीप रीति का
एक दीप दान का
एक दीप तुम जलाओ
एक दीप मैं जलाऊँ ……

 

एक हाथ तुम बढ़ाओ
एक हाथ मैं बढ़ाऊँ
अशिक्षा की ,धर्मान्धता की
अंधविश्वाश की ,कुप्रथाओं की
एक स्याही-लकीर तुम मिटाओ
एक काली लकीर मैं मिटाऊँ
एक दीप तुम जलाओ
एक दीप मैं जलाऊँ ………

 

एक आवाज तुम दो
एक आवाज मैं दूँ
मानवता की ,समानता की
अहिंसा की ,इन्साफ की
एक पुकार तुम सुनो
एक पुकार मैं सुनूँ
एक दीप तुम जलाओ
एक दीप मैं जलाऊँ .......

 

एक कदम तुम उठाओ
एक कदम मैं उठाऊँ
वतन में अमन का
समाज में सदभाव का
नारी के सम्मान का
देश के विकास का
एक दीप तुम जलाओ
एक दीप मैं जलाऊँ .......

 

एक प्रज्वलित दीप तुम्हारा
एक प्रज्वलित दीप मेरा
मिले बन जाये पवित्र ज्योति
विशालकाय दिव्य-अखण्ड ज्योति
अँधियारा मिटा दे हर अंतस का
उजला कर दे कण कण जग का
एक दीप तुम जलाओ
एक दीप मैं जलाऊँ ……
एक दीप प्रीत का
एक दीप ज्ञान का .....

 

 


-----मंजु शर्मा

 

 

 

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