“ प्रतिध्वनि “----रामचन्द्र किल्लेदार

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“ प्रतिध्वनि “----रामचन्द्र किल्लेदार

Post by admin » Sat Oct 20, 2018 11:28 am

“ प्रतिध्वनि “
मन के गुम्बद में
मैंने संकल्प की
एक आवाज लगाई –
कठिन परिश्रम करूँगा
और बड़ा आदमी बनूँगा |
कुछ शांत क्षणों के पश्चात
प्रतुतर में प्रतिध्वनी आई –
तैरने वाला कभी भी
किनारे बैठकर पत्थर नहीं फेंकता ,
और पानी की गहराई नहीं आँकता |
वह तुरन्त पानी में कूद जाता है
तब कहीं तल में जाकर
मोती ढूढकर लाता है .......... |
= रामचन्द्र किल्लेदार

( हिन्दुस्तान , 18 मई 1975 नई दिल्ली में प्रकाशित )
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