यूँ तो तमाम उम्र वादों में जी लिया---अमरेश सिंह भदौरिया

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यूँ तो तमाम उम्र वादों में जी लिया---अमरेश सिंह भदौरिया

Post by admin » Sun Sep 16, 2018 7:37 pm

Amresh Singh
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*************(ग़ज़ल)*************
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यूँ तो तमाम उम्र वादों में जी लिया।
लिखकर अतीत को किताबों में जी लिया।

जिंदगी तो हरदम ही पहेली बनी रही,
उलझे हुए सवालों ने जवाबो में जी लिया।

फश्ले बहार में चमन गुलज़ार जब हुआ,
खुशबूओं ने आकर गुलाबों में जी लिया।

रिश्तों की दूरियां चाहकर न मिट सकीं,
लालच ने इस तरह से नवाबों में जी लिया।

बाज़ार में सभी कुछ जायज़ है आजकल,
ढ़लती हुई उम्र ने शबाबों में जी लिया।

सुर्खियों में रहने की चाहत ने इस तरह,
कल्पना ने "अमरेश" ख्वाबों में जी लिया।

अमरेश सिंह भदौरिया
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