तेरे क़र्ज़ मेरे संग अब भी बाक़ी हैं-- शबाना के.आरिफ़

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तेरे क़र्ज़ मेरे संग अब भी बाक़ी हैं-- शबाना के.आरिफ़

Post by admin » Fri Jul 13, 2018 2:52 pm

Shabana K Aarif

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तेरे क़र्ज़ मेरे संग अब भी बाक़ी हैं
: शबाना के.आरिफ़

कुछ रस्में कुछ वादे मेरे संग अब भी बाक़ी हैं
ज़िन्दगी तेरे ख़्वाब मेरे संग अब भी बाक़ी हैं

तेरी खुशबु, तेरे जिस्म की रंगतें, वो शोखियाँ
खून-ऐ-दिल में रवाँ मेरे संग अब भी बाक़ी हैं

गर तू कहे मेरी आशनाई के नज़ारे और भी हैं
ज़ईफ़ हयात-ऐ-वफ़ा मेरे संग अब भी बाक़ी हैं

वो तेरे रग-ऐ-खूं में मेरे एहसासात जो हैं 'आरिफ़'
मेरे अमल में क़र्ज़ तेरा मेरे संग अब भी बाक़ी हैं

ना हो शुबाह कोई शिकायत मेरी ज़ात से तुझे
मेरे हमनशीं तेरे क़र्ज़ मेरे संग अब भी बाक़ी हैं
शबाना के.आरिफ़
(स्व:लिखित रचना के रचनाकार टीवी-फ़िल्म लेखक हैं )
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